पटना, 25 सितंबर। बिहार के योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा के एक बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामला जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित छेड़खानी और उसके बाद पीड़िता की पहचान से जुड़ी तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने का है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से परिवार के साथ तस्वीर पोस्ट किए जाने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए थे। तस्वीर बाद में हटा दी गई।

पीड़िता की पहचान वाले मामले पर क्या बोले मंत्री

भगवान सिंह कुशवाहा ने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का पीड़ित परिवार से पारिवारिक संबंध है और इसी वजह से उन्होंने परिवार से मुलाकात की। मंत्री ने तस्वीर साझा किए जाने को लेकर POCSO के उल्लंघन पर सवाल उठाया और विपक्ष पर मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।

हालांकि, POCSO एक्ट की धारा 23 मीडिया के जरिए बच्चे की पहचान उजागर करने से संबंधित प्रावधान तय करती है। इसी आधार पर विपक्षी नेताओं ने तस्वीर को लेकर सवाल उठाए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक तस्वीर में चेहरा धुंधला था, लेकिन पीड़िता की पहचान उजागर होने की आशंका को लेकर विवाद हुआ और पोस्ट हटा दी गई।

बांका के वायरल वीडियो पर भी दी प्रतिक्रिया

बांका के मंदार पर्वत से जुड़े एक वायरल वीडियो के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि उन्होंने वीडियो नहीं देखा है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी वीडियो के आधार पर खबर प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता की जांच की जानी चाहिए।

मंत्री ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अलग-अलग घटनाओं के वीडियो को जोड़कर पेश किया जा सकता है। उन्होंने इसे सरकार को बदनाम करने की संभावित कोशिश बताया।

यादव समाज को लेकर बयान पर विवाद

इसी दौरान मंत्री से केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की यादव समाज को लेकर की गई टिप्पणी पर सवाल किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक कुशवाहा ने मांझी के आकलन का समर्थन किया और जेल में बंद लोगों के आंकड़ों का हवाला देते हुए यादव समाज के एक हिस्से को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उनके इस बयान पर भी विवाद की स्थिति बनी है।

मंत्री के इन बयानों के बाद जमुई मामले, नाबालिग की निजता और सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की जिम्मेदारी को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।