बक्सर से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक सीधी और तेज कनेक्टिविटी देने वाली परियोजना अब अहम चरण में पहुंच गई है। गाजीपुर-बलिया-मांझीघाट ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के अलग-अलग हिस्सों पर निर्माण के साथ बक्सर स्पर को चालू करने की तैयारी तेज हो गई है।

परियोजना के पैकेज-1 के करीब 34 किलोमीटर हिस्से पर ट्रायल शुरू हो चुका है। अब पैकेज-4 के तहत बनाए जा रहे बक्सर स्पर पर फोकस है। एनएचएआई के अनुसार, दिसंबर तक इस हिस्से को यातायात के लिए शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।

17.27 किलोमीटर लंबा है बक्सर स्पर

बक्सर स्पर की लंबाई करीब 17.27 किलोमीटर है और इसके निर्माण पर लगभग 617.89 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह स्पर करीमुद्दीनपुर के पास मुख्य ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जुड़ेगा और भरौली होते हुए बक्सर में गंगा पुल के संपर्क मार्ग तक पहुंचेगा।

निर्माण कार्य का करीब 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा पूरा होने की जानकारी है। परियोजना के चालू होने के बाद बक्सर से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की दिशा में जाने वाले वाहनों को मौजूदा रास्ते की तुलना में अधिक सुगम विकल्प मिल सकेगा।

पुराने जाम वाले रास्ते से मिलेगी राहत

फिलहाल बक्सर से गाजीपुर और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले वाहनों को भरौली, कुंडेसर और भांवरकोल क्षेत्र के पुराने एनएच-31 से होकर गुजरना पड़ता है। इस मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव और कई जगह संकरी सड़क के कारण जाम की समस्या बनी रहती है।

नया स्पर शुरू होने के बाद यातायात को ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जोड़ने का विकल्प मिलेगा। इससे पुराने मार्ग पर वाहनों का दबाव कम होने और यात्रा समय में कमी आने की उम्मीद है।

परियोजना से जुड़े विवरण के अनुसार, बक्सर स्पर के चालू होने पर आजमगढ़, अयोध्या, लखनऊ और दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को दूरी और समय दोनों में लाभ मिल सकता है। इस मार्ग पर वाहन निर्धारित मानकों के अनुसार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से चल सकेंगे।

चार पैकेज में तैयार हो रहा करीब 134 किमी का नेटवर्क

पूरी ग्रीनफील्ड परियोजना को चार पैकेज में विकसित किया जा रहा है। इसमें करीब 117.12 किलोमीटर मुख्य ग्रीनफील्ड मार्ग और 17.27 किलोमीटर बक्सर स्पर शामिल है।

मुख्य पैकेजों में हृदयपुर-शाहपुर, शाहपुर-पिंडारी और पिंडारी-रिवीलगंज बाईपास के अलावा बक्सर स्पर शामिल है। परियोजना पूरी होने पर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को नया विकल्प मिलेगा।

इससे बक्सर के अलावा भोजपुर और पटना की ओर आने-जाने वाले यातायात को भी लखनऊ-दिल्ली की दिशा में बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। वहीं, सारण क्षेत्र मुख्य कॉरिडोर के जरिए नेटवर्क से जुड़ेगा।

गंगा पर तीसरे पुल से घटेगा ट्रैफिक का दबाव

बक्सर में गंगा नदी पर मौजूद पुलों के कारण भी यातायात व्यवस्था एक अहम चुनौती बनी हुई है। पुराने वीर कुंवर सिंह सेतु की क्षमता सीमित है, जबकि दूसरा दो लेन का पुल भी लगातार बढ़ते यातायात का दबाव झेल रहा है।

इसी समस्या को देखते हुए गंगा पर एक और पुल का निर्माण कराया जा रहा है। एनएचएआई, पटना के तहत करीब 3.2 किलोमीटर लंबा तीन लेन का पुल और एलिवेटेड एप्रोच बनाया जा रहा है।

सितंबर 2025 से शुरू हुई इस परियोजना का करीब 30 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी है। इसे फरवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

जांच के कारण पुल पर लगता है जाम

मौजूदा गंगा पुल पर बिहार और उत्तर प्रदेश की ओर जांच व्यवस्था होने के कारण कई बार वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। खासकर भारी वाहनों की संख्या बढ़ने पर जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है।

नया पुल और एलिवेटेड एप्रोच तैयार होने के बाद इस मार्ग की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही बक्सर स्पर और ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के जरिए बिहार से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुंच का एक और विकल्प तैयार होगा।

परियोजना की प्रमुख टाइमलाइन

  • 2022: परियोजना के पैकेज और डीपीआर स्तर पर स्वीकृति की प्रक्रिया।
  • 15 जून 2023: बक्सर स्पर के लिए नियुक्ति दिवस।
  • 14 जून 2025: मूल रूप से निर्धारित पूर्णता लक्ष्य।
  • दिसंबर 2026: बक्सर स्पर को शुरू करने का प्रयास।
  • सितंबर 2025: गंगा पर नए पुल और एलिवेटेड एप्रोच का निर्माण शुरू।
  • फरवरी 2028: नए गंगा पुल को पूरा करने का निर्धारित लक्ष्य।