पटना: बिहार में हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य में सोनपुर और भागलपुर-मुंगेर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण के लिए जमीन जुटाने की योजना तैयार कर ली गई है। दोनों परियोजनाओं के लिए करीब 7,373 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। सरकार की प्राथमिकता जमीन मालिकों से आपसी सहमति के आधार पर सीधे जमीन खरीदने की है। सहमति नहीं बनने या अन्य जरूरी परिस्थितियों में ही भूमि अधिग्रहण कानून का सहारा लिया जाएगा।
सोनपुर एयरपोर्ट के लिए 4,228 एकड़ जमीन की जरूरत
सारण जिले में प्रस्तावित सोनपुर एयरपोर्ट के लिए करीब 4,228 एकड़ जमीन जुटाई जानी है। इसके लिए सोनपुर और दरियापुर अंचल के लगभग 26 मौजों को चिह्नित किया गया है। इस परियोजना के दायरे में करीब 14,224 रैयत और उनकी जमाबंदियां आएंगी।
एयरपोर्ट के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पहले सलाहकार एजेंसी का चयन किया जाएगा। एजेंसी जमीन खरीदने की प्रक्रिया में जरूरी सहयोग करेगी। इसके बाद संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भागलपुर-मुंगेर एयरपोर्ट के लिए 3,145 एकड़ जमीन
भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र में प्रस्तावित अजगैबीनाथ धाम ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए करीब 3,145 एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई है। इसके लिए लगभग 14 मौजों को चिह्नित किया गया है। परियोजना से करीब 12 हजार रैयतों की जमीन प्रभावित हो सकती है।
प्रस्तावित क्षेत्र में भागलपुर सदर, सुल्तानगंज, मुंगेर सदर, तारापुर और बरियारपुर समेत कई अंचल शामिल हैं। इस परियोजना के लिए भी जमीन जुटाने की प्रक्रिया बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2020 के तहत आगे बढ़ाई जाएगी।
सीधे जमीन खरीदने को प्राथमिकता, फिर अधिग्रहण का विकल्प
दोनों एयरपोर्ट परियोजनाओं के लिए सरकार पहले जमीन मालिकों से सीधे खरीद का प्रयास करेगी। यदि आपसी सहमति नहीं बनती है या किसी अन्य आवश्यक परिस्थिति में इसकी जरूरत पड़ती है, तभी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
जमीन की कीमत निर्धारित करने का अधिकार संबंधित रैयती भूमि क्रय समितियों और सक्षम प्राधिकार के पास होगा। सलाहकार एजेंसी केवल प्रक्रिया में सहयोग करेगी। जमीन मालिकों को कितना मुआवजा या भुगतान दिया जाएगा, इसका फैसला एजेंसी नहीं करेगी।
कृषि भूमि और दियारा क्षेत्र का होगा सर्वेक्षण
दोनों प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए चिह्नित जमीन का बड़ा हिस्सा कृषि उपयोग में है। इसमें धान की खेती वाली जमीन के अलावा आबादी वाले क्षेत्र, बाग-बगीचे और अन्य संरचनाएं भी शामिल हैं। कुछ हिस्से दियारा क्षेत्र में आते हैं।
इन जमीनों का विशेष सर्वेक्षण विभिन्न चरणों में किया जा रहा है। जमीन की स्थिति, संबंधित रैयतों और अन्य जरूरी पहलुओं की जानकारी जुटाने के बाद आगे की प्रक्रिया को गति दी जाएगी।
दोनों परियोजनाओं के पूरा होने से बिहार में हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी। हालांकि, एयरपोर्ट निर्माण से जुड़े अगले चरण जमीन जुटाने, सर्वेक्षण और निर्धारित प्रक्रियाओं को पूरा करने पर निर्भर करेंगे।




