समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले के एक छोटे से गांव की बेटी ने देश के सैन्य इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई है। वारिसनगर के मकसूदपुर गांव की रहने वाली विंग कमांडर अंजलि सिंह (डिंपल) भारतीय वायुसेना में सेवा के दौरान विदेश में सैन्य राजनयिक के रूप में तैनात होने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।
मिग-29 लड़ाकू विमान की इंजीनियर अंजलि सिंह की 2019 में मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में तैनाती हुई थी। करीब 24 साल के सैन्य करियर के बाद वह अब वतन लौट चुकी हैं।
पिता को मानती हैं अपना रोल मॉडल
44 वर्षीय अंजलि सिंह के लिए सेना में जाना बचपन का सपना था। उनके पिता मदन प्रसाद सिंह भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। अंजलि उन्हें अपना रोल मॉडल मानती हैं।
अंजलि के मुताबिक, वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध का टीवी पर प्रसारण देखने के बाद उनके मन में वायुसेना में शामिल होने का संकल्प और मजबूत हो गया था। उन्होंने तय किया कि वह हर हाल में एयर फोर्स ज्वाइन करेंगी।
इंजीनियरिंग के बाद 2002 में वायुसेना में चयन
अंजलि सिंह ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जालंधर से की और नासिक से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने पुणे यूनिवर्सिटी से टेलीकम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के कोटद्वार में करीब दो साल तक निजी क्षेत्र में नौकरी की। इसके बाद वर्ष 2002 में उनका चयन भारतीय वायुसेना में हुआ।
वायुसेना में शामिल होने के बाद उन्होंने लड़ाकू स्क्वाड्रन के साथ काम किया और देश की सेवा की। मिग-29 जैसे लड़ाकू विमान से जुड़ी तकनीकी जिम्मेदारियों ने उनके सैन्य करियर को एक अलग पहचान दी।
मॉस्को में निभाई सैन्य राजनयिक की जिम्मेदारी
अंजलि सिंह की वर्ष 2019 में मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में तैनाती हुई। यहां उन्होंने सैन्य राजनयिक के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
विदेश में भारतीय मिशन के तहत इस भूमिका में तैनात होने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी के रूप में उनकी उपलब्धि को भारतीय सैन्य सेवा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
वह फरवरी 2023 में मॉस्को से वापस लौटीं। इसके बाद से उनका परिवार दिल्ली में रह रहा है।
गांव में खुशी का माहौल
अंजलि सिंह की उपलब्धि से उनके पैतृक गांव मकसूदपुर में भी खुशी का माहौल है। ग्रामीण दिलीप सिंह, मार्कंडेय सिंह, अनिल सिंह और हिमांशु सिंह का कहना है कि गांव की बेटी ने अपनी मेहनत और उपलब्धियों से पूरे इलाके का नाम रोशन किया है।
गांव के लोगों के लिए अंजलि की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि छोटे से ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने भारतीय वायुसेना में अपनी जगह बनाई और विदेश में सैन्य राजनयिक की जिम्मेदारी तक पहुंचीं।
परिवार के साथ दिल्ली में रह रही हैं अंजलि
वर्ष 2010 में अंजलि सिंह की शादी बेगूसराय के महना निवासी इंजीनियर राजकुमार से हुई। उनका आठ वर्षीय बेटा सक्षम है।
उनके भाई डॉ. मनीष कुमार सर्जन हैं और वह अपनी डॉक्टर पत्नी स्वाति और पिता के साथ बेंगलुरु में रहते हैं। वहीं, अंजलि का अपना परिवार फिलहाल दिल्ली में उनके साथ रह रहा है।
मकसूदपुर की इस बेटी की कहानी बिहार के ग्रामीण इलाकों से निकलकर देश की सेवा में ऊंचे मुकाम तक पहुंचने की प्रेरक मिसाल के तौर पर सामने आई है।




