पटना: बिहार में सूचना का अधिकार कानून (RTI Act) को प्रभावी तरीके से लागू कराने और राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। सूचना का अधिकार कार्यकर्ता संघ, बिहार ने मुख्य सूचना आयुक्त को एक समेकित मांग-पत्र सौंपकर आयोग के आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने, कानूनी प्रकोष्ठ गठित करने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
कार्यकर्ताओं ने आयोग की वेबसाइट पर मामलों की स्थिति, आदेशों की प्रतियां, लंबित मामलों के आंकड़े और वार्षिक प्रतिवेदन जैसी जानकारियां नियमित रूप से सार्वजनिक करने की भी अपील की है। इसके साथ ही सूचना देने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और एक महीने के भीतर बिंदुवार कार्रवाई रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
10 अक्टूबर को हुई बैठक में उठे कई मुद्दे
दिए गए दस्तावेज के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को RTI कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक की अध्यक्षता रजी हसन ने की। इसमें सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन, नागरिकों के सूचना पाने के अधिकार की रक्षा और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक में कार्यकर्ताओं ने कहा कि कई मामलों में लोक सूचना पदाधिकारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं कराते हैं। वहीं, प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों के स्तर पर भी अपीलों का समय पर निस्तारण नहीं होने की शिकायतें सामने आती हैं।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि सूचना आयोग के आदेशों का पालन नहीं होने से कानून के उद्देश्यों पर असर पड़ता है। इसलिए आदेशों के अनुपालन की नियमित निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है।
RTI एक्ट की धारा 4 के अनुपालन पर जोर
RTI कार्यकर्ताओं ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 के तहत स्वप्रेरित सूचना प्रकटीकरण को प्रभावी बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि आयोग और संबंधित सरकारी कार्यालयों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां नागरिकों को आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए।
इसके लिए सरकारी वेबसाइटों पर जरूरी सूचनाओं को नियमित रूप से अपडेट करने और सार्वजनिक जानकारी तक नागरिकों की पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया गया है।
मांग-पत्र में धारा 25 के तहत वार्षिक प्रतिवेदन की स्थिति भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है। कार्यकर्ताओं ने लंबित वार्षिक प्रतिवेदनों को निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार के माध्यम से बिहार विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत कराने की कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
आयोग के आदेशों की निगरानी के लिए बनेगा कानूनी प्रकोष्ठ?
मांग-पत्र में राज्य सूचना आयोग के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक सक्षम कानूनी प्रकोष्ठ अथवा अनुपालन निगरानी इकाई गठित करने की मांग की गई है।
कार्यकर्ताओं के मुताबिक, इस इकाई को आयोग के आदेशों पर अमल की निगरानी करनी चाहिए। यदि कोई अधिकारी आदेशों की अवहेलना करता है, तो उसके खिलाफ कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके अलावा बिहार के सभी जिलों में प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों के स्तर पर नियमित सुनवाई सुनिश्चित करने और अपीलकर्ताओं को समय पर सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी उठाई गई है।
RTI कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा
सूचना मांगने वाले नागरिकों और RTI कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर भी मांग-पत्र में चिंता जताई गई है। कार्यकर्ताओं ने कथित आपराधिक हमलों, झूठे मुकदमों और प्रताड़ना के मामलों से निपटने के लिए एक सशक्त इकाई गठित करने की मांग की है।
उनका कहना है कि सूचना मांगने के कारण किसी नागरिक या कार्यकर्ता को असुरक्षा अथवा कानूनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। इसके लिए जरूरत के मुताबिक सुरक्षा और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई की मांग
दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले अपीलकर्ताओं, शिकायतकर्ताओं और दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नियमित सुनवाई की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई है।
इससे लोगों को हर सुनवाई के लिए पटना आने की जरूरत कम हो सकती है और समय तथा खर्च की बचत हो सकती है। हालांकि, यह सुविधा किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत लागू होगी, इस बारे में आयोग की ओर से किसी निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
वेबसाइट और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक होंगी जानकारियां?
RTI कार्यकर्ताओं ने राज्य सूचना आयोग की वेबसाइट को अधिक पारदर्शी और उपयोगी बनाने की मांग की है। इसके तहत निम्न जानकारियां नियमित रूप से अपडेट करने का अनुरोध किया गया है:
- सुनवाई की तारीख और मामलों की वर्तमान स्थिति।
- आयोग के आदेशों की प्रतियां।
- लंबित मामलों के आंकड़े।
- वार्षिक प्रतिवेदन और संबंधित दस्तावेज।
- अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई और अधिरोपित दंड की वसूली से जुड़ी जानकारी।
इसके अलावा आयोग के महत्वपूर्ण आदेशों, जनहित से जुड़े निर्देशों और RTI जागरूकता कार्यक्रमों का आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यमों से प्रचार-प्रसार करने पर भी जोर दिया गया है।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और एक महीने में रिपोर्ट की मांग
मांग-पत्र में सूचना उपलब्ध कराने में अनुचित देरी, वैधानिक दायित्वों के उल्लंघन और आयोग के आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
कार्यकर्ताओं ने अधिरोपित दंड की राशि की वसूली सुनिश्चित करने, उसकी नियमित समीक्षा करने और संबंधित रिपोर्ट वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का अनुरोध भी किया है।
सूचना का अधिकार कार्यकर्ता संघ ने मुख्य सूचना आयुक्त से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक प्रशासनिक और वैधानिक कदम उठाने की अपील की है। साथ ही, एक महीने के भीतर प्रत्येक मांग पर की गई कार्रवाई की बिंदुवार रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सूचना आयोग इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है और RTI कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, नागरिकों की सुविधा तथा सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कौन-से कदम उठाए जाते हैं।




