पटना: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर बनाने और शहरों को जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में अरवल शहर में करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से 12.8 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड बाईपास का निर्माण प्रस्तावित है। इस परियोजना से अरवल के साथ-साथ उमैराबाद और बैदराबाद में भी यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से इस परियोजना को पिछले साल मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है। बाईपास बनने के बाद बड़े वाहनों को शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से होकर गुजरने की जरूरत कम पड़ेगी। इससे स्थानीय लोगों के आवागमन, व्यापारिक गतिविधियों और आपातकालीन सेवाओं को राहत मिल सकती है।
बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती
बिहार में सड़क परियोजनाएं आवागमन को सुगम बनाने के साथ-साथ स्थानीय बाजारों और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। अरवल में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड बाईपास इसी दिशा में एक अहम परियोजना है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर वाहनों का दबाव अधिक रहने के कारण अरवल शहर में अक्सर जाम की स्थिति बनती है। बाईपास बनने से शहर के भीतर से गुजरने वाले वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परियोजना से मिलने वाली वास्तविक राहत निर्माण पूरा होने और यातायात व्यवस्था में बदलाव के बाद ही स्पष्ट होगी।
600 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा 12.8 KM लंबा बाईपास
अरवल में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड बाईपास की लंबाई 12.8 किलोमीटर होगी। इस परियोजना पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इसके निर्माण के लिए सदर प्रखंड के 20 मौजों में आने वाले 756 भूखंडों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परियोजना के लिए कुल 55.874 हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी।
भूमि अधिग्रहण और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। फिलहाल निर्माण शुरू होने और पूरा होने की आधिकारिक समयसीमा की पुष्टि जरूरी है।
NH-139 पर कहां से कहां तक बनेगा बाईपास?
प्रस्तावित ग्रीनफील्ड बाईपास का रूट राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर प्रसादी इंग्लिश बाजार से शुरू होगा। यहां से सड़क अरवल समाहरणालय के पूर्वी हिस्से से होते हुए मोथा गांव के रास्ते आगे बढ़ेगी और पिपरा बंगला गांव के समीप फिर से NH-139 से जुड़ जाएगी।
इस रूट के जरिए शहर के अंदर से गुजरने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराने की योजना है। इससे अरवल के व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम हो सकता है।
अरवल में जाम से क्यों परेशान हैं लोग?
अरवल शहर में जाम की समस्या की प्रमुख वजह राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर वाहनों की अधिक आवाजाही है। भगत सिंह चौक के पास NH-139 और NH-33 के मिलने से इस इलाके में यातायात का दबाव और बढ़ जाता है।
दिनभर वाहनों की लंबी कतारों के कारण स्थानीय लोगों और राहगीरों को परेशानी होती है। बाजार में आने-जाने वाले ग्राहकों और दुकानदारों की गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।
कई बार जाम के कारण एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को रास्ता दिलाने में ट्रैफिक पुलिस को मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में बाईपास बनने से शहर के भीतर यातायात का दबाव घटने की उम्मीद है।
उमैराबाद और बैदराबाद को भी मिल सकती है राहत
इस परियोजना का लाभ केवल अरवल शहर तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। उमैराबाद और बैदराबाद जैसे आसपास के इलाकों में भी वाहनों की आवाजाही सुगम हो सकती है।
बड़े वाहनों को शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से बाहर निकालने का विकल्प मिलने पर मुख्य सड़कों पर जाम कम करने में मदद मिल सकती है। इससे स्थानीय व्यापार, यात्रियों और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों को फायदा हो सकता है।
एंबुलेंस और दूसरे वाहनों की आवाजाही होगी आसान
शहर के अंदर जाम लगने पर एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं के वाहनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाईपास तैयार होने के बाद गुजरने वाले भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है, जिससे शहर की मुख्य सड़कों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, इसके लिए बाईपास के साथ-साथ शहर की मौजूदा यातायात व्यवस्था को भी बेहतर बनाना जरूरी होगा।
भूमि अधिग्रहण के बाद परियोजना पर आगे बढ़ेगा काम
बाईपास निर्माण के लिए 20 मौजों में फैले 756 भूखंडों की कुल 55.874 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इसलिए भूमि अधिग्रहण और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाएं परियोजना के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
परियोजना की मंजूरी और प्रस्तावित लागत के अलावा निर्माण शुरू होने, जमीन अधिग्रहण पूरा होने और सड़क चालू होने की तारीख की आधिकारिक पुष्टि भी जरूरी है।
बिहार के सड़क विकास के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
अरवल का ग्रीनफील्ड बाईपास राज्य में सड़क संपर्क और शहरी यातायात को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। करीब 600 करोड़ रुपये की प्रस्तावित लागत और 12.8 किलोमीटर की लंबाई वाली इस परियोजना से शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम करने की उम्मीद है।
अगर परियोजना तय योजना के अनुसार पूरी होती है, तो अरवल, उमैराबाद और बैदराबाद के लोगों को आवागमन में राहत मिल सकती है। फिलहाल लोगों की नजर भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्य शुरू होने और परियोजना की समयसीमा से जुड़ी आधिकारिक जानकारी पर रहेगी।




