बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने वर्ष 2023 की सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान श्रवण कुमार (25) के रूप में हुई है। वह पटना जिले के सिगौरी थाना क्षेत्र के हादीनगर का रहने वाला है।

EOU के मुताबिक, श्रवण कुमार ने अभ्यर्थी धनंजय कुमार की सिपाही भर्ती परीक्षा पास कराने के लिए कथित तौर पर 9 लाख रुपये में सेटिंग कराने में अहम भूमिका निभाई थी। यह मामला नालंदा जिले के लहेरी थाना कांड संख्या 611/23 से जुड़ा है।

परीक्षा केंद्र पर पकड़ा गया था अभ्यर्थी

मामला 1 अक्टूबर 2023 का है। केंद्रीय चयन परिषद (सिपाही भर्ती) की लिखित परीक्षा के दौरान बिहारशरीफ के भैंसासुर स्थित आवासीय मॉडल मध्य विद्यालय परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी धनंजय कुमार को पकड़ा गया था।

जांच के दौरान उसके प्रवेश पत्र पर लगी तस्वीर उसके आधार कार्ड और चेहरे से मेल नहीं खाई। तलाशी में उसके पास ब्लूटूथ डिवाइस भी बरामद किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, इस उपकरण का इस्तेमाल परीक्षा में नकल के लिए किया जाना था।

दूसरे स्कॉलर की तस्वीर लगाकर कराने की थी तैयारी

पूछताछ में धनंजय कुमार ने बताया था कि परीक्षा पास कराने के लिए सेटर के माध्यम से उसके प्रवेश पत्र पर दूसरे स्कॉलर की तस्वीर लगाई गई थी। योजना के तहत उस स्कॉलर को परीक्षा देने के लिए आना था।

हालांकि, स्कॉलर के परीक्षा केंद्र पर नहीं पहुंचने के बाद धनंजय को नकल के लिए ब्लूटूथ डिवाइस उपलब्ध कराया गया था।

9 लाख रुपये में हुई थी कथित सेटिंग

EOU की जांच में श्रवण कुमार की भूमिका सामने आई। पूछताछ में श्रवण ने कथित तौर पर बताया कि उसने अपने परिचित सेटर नीरज के माध्यम से धनंजय की परीक्षा पास कराने के लिए 9 लाख रुपये में सेटिंग कराई थी।

जांच के अनुसार, धनंजय के प्रवेश पत्र पर स्कॉलर की तस्वीर लगवाने की व्यवस्था भी इसी नेटवर्क के जरिए की गई थी। स्कॉलर के परीक्षा में नहीं पहुंचने के बाद धनंजय से फोन-पे के जरिए 20 हजार रुपये लिए गए।

बताया गया कि इस रकम में से कुछ हिस्सा नीरज को दिया गया, जबकि बाकी रकम श्रवण ने अपने पास रख ली। नीरज के माध्यम से ही धनंजय को ब्लूटूथ डिवाइस उपलब्ध कराया गया था।

न्यायिक हिरासत में भेजा गया

EOU ने श्रवण कुमार को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी अब मामले में शामिल अन्य आरोपियों और कथित गिरोह की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

EOU की जांच का फोकस इस बात पर भी है कि सिपाही भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों को पास कराने के लिए कथित तौर पर किस तरह का नेटवर्क काम कर रहा था और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।