पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार और जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर के बीच जुबानी जंग लगातार तीखी होती जा रही है। प्रशांत किशोर के ‘कच्चा-चिट्ठा’ सार्वजनिक करने के दावे पर अब नीरज कुमार ने जवाब दिया है। उन्होंने व्यक्तिगत आरोपों के बजाय नीतियों और मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ने की बात कही और अपनी संपत्ति से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक की।

नीरज कुमार ने प्रशांत किशोर के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जनसेवा करना उनका दायित्व है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे 12 अक्टूबर तक खुद को नीरज कुमार मानकर चुनाव प्रचार में जुट जाएं। इस बयान के साथ उन्होंने चुनाव में अपनी जीत को लेकर भी भरोसा जताया।

‘मेरी कुंडली छिपी नहीं है’, नीरज कुमार का जवाब

प्रशांत किशोर की ओर से कथित तौर पर नीरज कुमार के खिलाफ जानकारी सार्वजनिक करने की चेतावनी दिए जाने के बाद जेडीयू उम्मीदवार ने अपनी निजी जिंदगी और संपत्ति का जिक्र किया।

नीरज कुमार ने कहा कि उनकी कुंडली छिपी हुई नहीं है। उनके मुताबिक, टाल में उनके हिस्से में 10 बीघा जमीन है और मोकामा स्थित उनके घर में चार कमरे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे तीन भाई हैं और उनके बारे में जो भी जानना है, सार्वजनिक रूप से जानकारी हासिल की जा सकती है।

उन्होंने अपने जन्मदिन से जुड़ी व्यक्तिगत बात भी साझा की। नीरज कुमार के अनुसार, उनका जन्म 9 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन हुआ था और उनके बेटे का जन्मदिन भी इसी तारीख को पड़ता है। उन्होंने इसे अपने लिए खुशी और सौभाग्य की बात बताया।

जेडीयू नेताओं के कागजात पहुंचाने के आरोप से किया इनकार

प्रशांत किशोर की ओर से दावा किया गया था कि पिछले करीब डेढ़ साल में जेडीयू के कई नेताओं से जुड़ी जानकारियां और दस्तावेज उन्हें मिले हैं। इस बयान को नीरज कुमार से जोड़कर देखा जा रहा था।

जब नीरज कुमार से पूछा गया कि क्या उन्होंने जेडीयू नेताओं से जुड़े कागजात प्रशांत किशोर तक पहुंचाए थे, तो उन्होंने इससे साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह ऐसा काम नहीं करते।

नीरज कुमार ने दोहराया कि चुनाव में व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के बजाय नीतियों और मुद्दों के आधार पर मतदाताओं से समर्थन मांगा जाना चाहिए।

प्रशांत किशोर ने क्या कहा था?

प्रशांत किशोर ने हाल में दावा किया था कि उनके पास जेडीयू के कई नेताओं से जुड़ी जानकारियां और दस्तावेज हैं। उन्होंने कथित तौर पर चेतावनी दी थी कि अगर नीरज कुमार बयानबाजी जारी रखते हैं, तो वह उनके खिलाफ जानकारी सार्वजनिक कर सकते हैं।

इसके बाद पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनावी मुकाबला राजनीतिक मुद्दों के साथ व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप को लेकर भी चर्चा में आ गया है।

हालांकि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में इन्हें संबंधित नेताओं के बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

पहले भी एक-दूसरे पर साध चुके हैं निशाना

नीरज कुमार और प्रशांत किशोर के बीच विवाद पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रहा है। नीरज कुमार ने पहले प्रशांत किशोर को भाषा की मर्यादा बनाए रखने की नसीहत दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार की नीतियों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन व्यक्तिगत आरोपों से बचना चाहिए।

नीरज कुमार ने पहले प्रशांत किशोर की कथित 14 कंपनियों से जुड़ी जानकारी का भी जिक्र किया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि बांकीपुर विधानसभा सीट जीत लेने भर से किसी को खुद को ‘ग्लोबल थिंकर’ नहीं समझना चाहिए।

इसके जवाब में प्रशांत किशोर ने भी हमला तेज किया। उन्होंने नीरज कुमार के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पटना के शिक्षक और स्नातक मतदाता इस बार बदलाव के पक्ष में हैं।

प्रशांत किशोर ने जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के साथ भाजपा उम्मीदवार नवीन किशोर यादव को भी चुनाव में हराने का दावा किया। उन्होंने बांकीपुर विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वहां राजनीतिक समीकरण बदले, उसी तरह विधान परिषद चुनाव में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

नीरज कुमार ने जताया जीत का भरोसा

आरोप-प्रत्यारोप के बीच नीरज कुमार ने चुनावी मुकाबले को लेकर आत्मविश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव में किसी तरह की चुनौती नजर नहीं आ रही है और समाज के सभी वर्गों का समर्थन उनके साथ है।

एक तरफ नीरज कुमार जेडीयू संगठन और अपने राजनीतिक अनुभव को अपनी ताकत बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशांत किशोर बदलाव के मुद्दे पर मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश कर रहे हैं।

पटना स्नातक सीट पर प्रतिष्ठा की लड़ाई

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ गई है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में नीरज कुमार और प्रशांत किशोर के बीच जारी बयानबाजी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

अब देखना होगा कि 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान में मतदाता किन मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। क्या व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप चुनावी नतीजों को प्रभावित करेंगे या मतदाता उम्मीदवारों के काम, नीतियों और राजनीतिक अनुभव के आधार पर फैसला करेंगे, इसका जवाब चुनाव परिणाम आने के बाद ही मिलेगा।