पटना: बिहार के बिजली उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज, बार-बार बिजली बाधित होने और ट्रांसफार्मर खराब होने जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। राज्य में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ऊर्जा विभाग करीब 12 हजार करोड़ रुपये की योजना तैयार कर रहा है। इसके तहत पुराने और जर्जर बिजली के तारों, पोल और कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों को बदला जाएगा। योजना से राज्य के करीब सवा दो करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।

ऊर्जा विभाग इस योजना को मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजने की तैयारी में है। योजना के लिए बैंकों से कर्ज लेने की भी तैयारी की जा रही है। हालांकि, उपभोक्ताओं को इसका वास्तविक लाभ योजना को मंजूरी मिलने और काम पूरा होने के बाद ही मिल सकेगा।

उपभोक्ताओं को क्या-क्या राहत मिलने की उम्मीद है?

प्रस्तावित योजना का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाना और बढ़ती खपत के अनुरूप व्यवस्था तैयार करना है। इससे उपभोक्ताओं को कई तरह से फायदा मिलने की उम्मीद है।

  • लो वोल्टेज की समस्या में कमी: कम क्षमता वाले तारों को उच्च क्षमता वाले तारों से बदलने और ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने से अधिक बिजली खपत वाले इलाकों में वोल्टेज की समस्या कम हो सकती है।
  • बिजली कटौती से राहत: जर्जर तारों और पुराने उपकरणों के कारण होने वाली तकनीकी खराबियों में कमी आने से बिजली आपूर्ति अधिक सुचारु हो सकती है।
  • ट्रांसफार्मर जलने की समस्या पर नियंत्रण: बिजली की खपत के अनुरूप ट्रांसफार्मर लगाने से उन पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार कम करने में मदद मिल सकती है।
  • बिजली संबंधी दुर्घटनाओं का जोखिम कम: पुराने तारों और जर्जर बिजली के पोल को बदलने से तार टूटकर गिरने और पोल गिरने जैसी घटनाओं का खतरा कम हो सकता है।
  • बिजली की बर्बादी में कमी: बेहतर वितरण नेटवर्क से तकनीकी नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इन सुविधाओं में सुधार की वास्तविक स्थिति संबंधित क्षेत्रों में काम पूरा होने और बिजली नेटवर्क की क्षमता बढ़ने पर निर्भर करेगी।

12 हजार करोड़ रुपये से बदले जाएंगे पुराने तार और ट्रांसफार्मर

ऊर्जा विभाग की योजना के तहत बड़े स्तर पर बिजली वितरण नेटवर्क को दुरुस्त करने की तैयारी है। विभाग को लगातार जर्जर तारों, बिजली के पोल गिरने और ट्रांसफार्मर जलने की शिकायतें मिल रही थीं।

विभागीय समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने अधिकारियों को समस्या के समाधान के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा था।

योजना में कम क्षमता वाले तारों को उच्च क्षमता वाले तारों से बदलने और बिजली की खपत के अनुरूप ट्रांसफार्मर लगाने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य बढ़ते बिजली लोड के बावजूद वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना है।

बिजली की खपत बढ़ने से नेटवर्क पर बढ़ा दबाव

वर्ष 2015-16 के बाद पिछले एक दशक में बिहार में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या दोगुनी से अधिक बढ़ने की जानकारी दी गई है। इससे बिजली वितरण नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है।

अब ग्रामीण इलाकों में भी एसी, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे पुराने तारों और ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त भार पड़ता है। कई जगहों पर उपकरणों की क्षमता बढ़ती खपत के अनुरूप नहीं होने से लो वोल्टेज और तकनीकी खराबियों की समस्या सामने आ सकती है।

ऊर्जा विशेषज्ञ एसके सिंह के अनुसार, जर्जर तारों को बदलने और अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाने के साथ पावर सबस्टेशन तथा ग्रिड की संख्या बढ़ाने की भी जरूरत है।

किस काम पर कितनी राशि खर्च करने का प्रस्ताव?

प्रस्तावित योजना में बिजली वितरण व्यवस्था को सुधारने के लिए अलग-अलग मदों में खर्च निर्धारित किया गया है।

  • पोल और केबल के तार: 1.18 लाख किलोमीटर के लिए 8,465 करोड़ रुपये।
  • बांस-बल्ले पर लगे तार: 33,698 किलोमीटर के लिए 2,262 करोड़ रुपये।
  • ट्रांसफार्मर: 12 हजार ट्रांसफार्मर लगाने या बदलने के लिए 370 करोड़ रुपये।

इन कार्यों के जरिए बिजली वितरण नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और पुराने उपकरणों के कारण होने वाली समस्याओं को कम करने का लक्ष्य है।

उत्तर और दक्षिण बिहार में कहां कितना होगा खर्च?

योजना के तहत उत्तर और दक्षिण बिहार की बिजली वितरण कंपनियों के क्षेत्रों में अलग-अलग राशि खर्च करने का प्रस्ताव है।

  • उत्तर बिहार ऊर्जा वितरण कंपनी: 21 जिलों में 6,066 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
  • दक्षिण बिहार ऊर्जा वितरण कंपनी: 17 जिलों में 5,031 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है।

दोनों वितरण कंपनियों के क्षेत्रों में प्रस्तावित खर्च का कुल योग 11,097 करोड़ रुपये है। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की बताई जा रही पूरी योजना में शेष राशि और अन्य मदों का विवरण आधिकारिक स्वीकृति के बाद स्पष्ट होगा।

कब से मिलने लगेगा उपभोक्ताओं को फायदा?

फिलहाल ऊर्जा विभाग की योजना को कैबिनेट से मंजूरी मिलना बाकी है। इसके बाद वित्तीय व्यवस्था, टेंडर और कार्यान्वयन की प्रक्रिया के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में काम शुरू हो सकेगा।

इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उपभोक्ताओं को किस तारीख से लो वोल्टेज या बिजली कटौती की समस्या से राहत मिलने लगेगी। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि किन इलाकों में पहले काम शुरू होता है और नेटवर्क सुधारने का काम कितनी तेजी से पूरा किया जाता है।

बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम है योजना?

बिजली की बढ़ती मांग के बीच वितरण नेटवर्क को मजबूत करना जरूरी हो गया है। जर्जर तारों, पुराने पोल और कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों को बदलने से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

अगर प्रस्तावित योजना को मंजूरी मिलती है और इसे तय समय पर लागू किया जाता है, तो बिहार के करीब सवा दो करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज, तकनीकी खराबियों और बार-बार बिजली बाधित होने जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सबकी नजर कैबिनेट की मंजूरी और योजना के क्रियान्वयन पर है।