पटना, 31 अगस्त 2026 : बिहार में शिक्षकों ने सातवें वेतनमान की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर डिजिटल अभियान शुरू कर दिया है। #BiharTeachersNeed7thPay हैशटैग के जरिए शिक्षक मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से समान वेतनमान लागू करने की मांग कर रहे हैं। उधर, शिक्षक नेताओं का कहना है कि राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बावजूद उन्हें अब तक सातवें वेतनमान का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। बिहार शिक्षक मंच के आह्वान पर शिक्षकों ने सुबह 11 बजे से सोशल मीडिया पर अभियान चलाया। इश बीच प्रदेश के शिक्षकों का दावा है कि अभियान के कुछ समय बाद #BiharTeachersNeed7thPay तेजी से ट्रेंड करने लगा। इस अभियान के जरिए शिक्षकों ने सरकार से जल्द ठोस निर्णय लेने की मांग की है।

शिक्षक बोले- अब सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा

डिजिटल अभियान से जुड़े शिक्षक नेता अश्विनी पांडेय ने कहा कि शिक्षक पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनका कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षकों को लेवल-6 से लेवल-8 तक के वेतन लाभ दिए जाने चाहिए। शिक्षकों का तर्क है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन के अलावा दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पे-लेवल का लाभ मिल रहा है। उनका कहना है कि बिहार में अलग वेतन संरचना होने के कारण राज्य के शिक्षक दूसरे राज्यों के मुकाबले खुद को पीछे महसूस कर रहे हैं।

राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बाद वेतनमान पर सवाल

शिक्षक नेताओं का कहना है कि सक्षमता परीक्षा और बीपीएससी के माध्यम से शिक्षकों को सरकारी सेवा में शामिल कर राज्यकर्मी का दर्जा दिया गया है। इसके बावजूद उन्हें अन्य सरकारी कर्मचारियों के समान सातवें वेतनमान का लाभ नहीं मिल रहा है। शिक्षकों का सवाल है कि जब उन्हें राज्य सरकार के कर्मचारी के तौर पर सेवा में शामिल किया गया है, तो फिर वेतन संरचना में समानता क्यों नहीं है।

पुरानी पेंशन और सेवा शर्तों का भी मुद्दा

शिक्षकों की नाराजगी केवल सातवें वेतनमान तक सीमित नहीं है। शिक्षक संगठनों की ओर से पुरानी पेंशन व्यवस्था, नई पेंशन योजना और सेवा शर्तों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि पुराने सहायक शिक्षक संवर्ग की जगह विशिष्ट शिक्षक और विद्यालय अध्यापक जैसे नए संवर्ग बनाए गए हैं। ऐसे में वेतन, पेंशन और दूसरी सेवा सुविधाओं को लेकर भी स्पष्ट और समान व्यवस्था की जरूरत है।

महंगाई और ट्रांसफर को लेकर भी मांग

शिक्षक महंगाई के अनुरूप वेतन में बढ़ोतरी और दूसरे राज्यों के शिक्षकों के बराबर वेतनमान की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर भी शिक्षक संगठनों ने असंतोष जताया है। शिक्षकों के मुताबिक ट्रांसफर के लिए नियमित शिक्षकों की तरह 30 स्कूलों के चयन का प्रावधान किया गया है। शिक्षक इस व्यवस्था में भी राहत और ज्यादा व्यावहारिक विकल्प की मांग कर रहे हैं।

सरकार से ठोस फैसले की मांग

डिजिटल अभियान के जरिए शिक्षकों ने सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की कोशिश की है। शिक्षक नेताओं का कहना है कि अब केवल आश्वासन या भरोसा देने के बजाय सरकार को सातवें वेतनमान और अन्य सेवा संबंधी मांगों पर स्पष्ट फैसला लेना चाहिए। शिक्षकों का कहना है कि उनकी मांग समान वेतन, बेहतर सेवा शर्तों और सम्मानजनक आर्थिक लाभ से जुड़ी है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इस मुद्दे पर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर शिक्षकों की नजर बनी हुई है।