पटना, 10 सितंबर 2026 : बिहार के शहरी इलाकों में ऑटो और ई-रिक्शा के परिचालन को अब व्यवस्थित करने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के सभी 38 जिला मुख्यालयों में जाम की समस्या कम करने के लिए परिवहन विभाग नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इसके तहत ऑटो और ई-रिक्शा के लिए जोन और रूट निर्धारित किए जाएंगे। इसके साथ ही वाहनों की पहचान के लिए कलर कोड और QR Code का इस्तेमाल भी किया जाएगा। राज्य में करीब छह लाख ऑटो और ई-रिक्शा संचालित होने का अनुमान है। नई व्यवस्था के तहत इन वाहनों को निर्धारित जोन और रूट के अनुसार चलाने की तैयारी है। प्रदेश के परिवहन विभाग का लक्ष्य अगले दो से तीन महीनों में इस व्यवस्था को पूरे बिहार में लागू करना है।

कलर कोड से पता चलेगा किस रूट पर चलेगा वाहन

नई व्यवस्था में अलग-अलग जोन और रूट के लिए अलग Color Code तय किया जाएगा। ऑटो और ई-रिक्शा पर संबंधित Route Number भी अंकित किया जाएगा। इससे यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि कौन सा वाहन किस इलाके और किस रूट पर चलने के लिए अधिकृत है। परिवहन विभाग प्रत्येक शहर में सड़कों की क्षमता और यातायात के दबाव का आकलन करेगा। इसी आधार पर वाहनों की संख्या और उनके रूट निर्धारित किए जाएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी एक सड़क या इलाके में जरूरत से ज्यादा ऑटो और ई-रिक्शा के जमाव को कम करना है।

हर ऑटो और ई-रिक्शा पर लगेगा QR Code

नई व्यवस्था में वाहनों पर विशेष QR Code भी लगाया जाएगा। QR Code को स्कैन करने पर वाहन और चालक से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इसमें वाहन मालिक और चालक का विवरण, वाहन का निर्धारित रूट, संबंधित ट्रैफिक एसपी कार्यालय और थाना जैसी जानकारी शामिल किए जाने की योजना है। इससे परिवहन और पुलिस प्रशासन के लिए वाहनों की पहचान और निगरानी आसान हो सकती है।

पटना में जल्द शुरू होगा पोर्टल और मोबाइल एप

राजधानी पटना में इस व्यवस्था को पहले लागू करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए परिवहन विभाग एक Dedicated Portal और Mobile App शुरू करने की तैयारी में है। इसके माध्यम से ऑटो और ई-रिक्शा चालक या वाहन मालिक परिचालन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पटना डीटीओ के अनुसार, राजधानी में जोन, कलर कोड और रूट से जुड़ी तैयारी पहले ही की जा चुकी है।

ज्यादा आवेदन आए तो लॉटरी से होगा चयन

किसी निर्धारित जोन या रूट के लिए अगर तय संख्या से ज्यादा आवेदन आते हैं, तो चयन के लिए लॉटरी सिस्टम अपनाया जा सकता है। ऐसे वाहन मालिकों को प्राथमिकता देने की तैयारी है जो खुद वाहन चलाते हैं और उनके पास वैध ऑटो परमिट है। आवेदन की समीक्षा के बाद सक्षम प्राधिकार अंतिम निर्णय लेगा।

पटना के इन इलाकों में रहता है ज्यादा ट्रैफिक दबाव

पटना के कई प्रमुख इलाकों में रोजाना जाम और ट्रैफिक दबाव की समस्या सामने आती है। इनमें बोरिंग रोड चौराहा, बेली रोड रुकनपुर, पाटलिपुत्र साई मंदिर, अनीसाबाद गोलंबर और फुलवारी गोलंबर प्रमुख हैं। इसके अलावा फुलवारी टमटम पड़ाव, अशोक राजपथ, कंकड़बाग ऑटो स्टैंड, खेतान मार्केट, आईजीआईएमएस, राजापुर पुल, पटना जंक्शन गोलंबर, करगिल चौक और जीरो माइल जैसे इलाके भी ट्रैफिक दबाव वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। बाइपास जगनपुरा, जीपीओ गोलंबर और राजीव नगर अटल पथ फ्लाइओवर के नीचे भी वाहनों का दबाव रहता है।

जाम के साथ प्रदूषण कम करने की भी उम्मीद

परिवहन विभाग का मानना है कि ऑटो और ई-रिक्शा के लिए निर्धारित Zone और Route होने से शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर हो सकती है। तय रूट पर वाहनों के संचालन से अनावश्यक आवाजाही कम होने की उम्मीद है। इससे ट्रैफिक जाम के साथ-साथ वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा निर्धारित क्षमता के अनुसार यात्रियों को बैठाने और वाहनों की निगरानी में भी यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।

बिहार के सभी जिलों में लागू करने की तैयारी

परिवहन विभाग ने सभी जिलों में ऑटो और ई-रिक्शा के परिचालन को Color Code, Zone और Route के आधार पर व्यवस्थित करने की दिशा में काम शुरू किया है। पटना में इसे जल्द लागू करने की तैयारी है, जबकि दूसरे जिला मुख्यालयों में भी इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है। विभाग का लक्ष्य आने वाले दो से तीन महीनों में इस व्यवस्था को पूरे बिहार में लागू करना है। परिवहन विभाग के आयुक्त आरिफ अहसन के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में ऑटो और ई-रिक्शा के व्यवस्थित परिचालन की दिशा में काम किया जा रहा है। पटना में यह व्यवस्था जल्द धरातल पर उतारने की तैयारी है।

क्या बदलेगा ?

  • ऑटो और ई-रिक्शा के लिए जोन और रूट तय होंगे
  • अलग-अलग रूट के लिए कलर कोड होगा
  • वाहनों पर रूट नंबर अंकित किया जाएगा
  • वाहनों पर QR Code लगाया जाएगा
  • चालक और वाहन की जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध होगी
  • ज्यादा आवेदन आने पर लॉटरी से चयन हो सकता है
  • वैध परमिट वाले और खुद वाहन चलाने वालों को प्राथमिकता दी जा सकती है
  • व्यवस्था को धीरे-धीरे बिहार के सभी 38 जिला मुख्यालयों में लागू करने की तैयारी है