पटना, 2 अक्टूबर 2026 : बिहार में आपातकालीन पुलिस सेवा यानी Dial 112 को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए सरकार और विभाग ने तैयारी भी शुरू कर दी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी जिले में Dial 112 पर वारदात या आपात स्थिति की सूचना मिलते ही संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) और पुलिस उपाधीक्षक (SDPO) को भी इसकी जानकारी तुरंत मिल सकेगी। इसका उद्देश्य पुलिस की निगरानी बढ़ाने और घटनास्थल तक रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर करना है। इसके लिए Emergency Response Support System (ERSS) के तहत जिलों के SP और DSP को टैब उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके साथ ही सिस्टम के सर्वर को भी अपग्रेड किया जा रहा है।

अभी कैसे काम करता है Dial 112 ?

वर्तमान व्यवस्था में Dial 112 पर सूचना मिलने के बाद शिकायतकर्ता की लोकेशन के आधार पर सबसे नजदीकी 112 वाहन को टैग किया जाता है। इसके बाद घटना की जानकारी संबंधित वाहन और फिर थानाध्यक्ष तक पहुंचाई जाती है। मगर अब नई व्यवस्था में यही अलर्ट SP और SDPO स्तर तक भी पहुंचेगा, जिससे वरिष्ठ अधिकारी भी घटनाओं की स्थिति पर नजर रख सकेंगे।

SP देख सकेंगे जिले के 112 वाहनों की लोकेशन

नई व्यवस्था में जिले के SP अपने क्षेत्र में तैनात सभी 112 वाहनों की लोकेशन देख सकेंगे। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कौन-सा वाहन किस स्थान पर है और वह लगातार पेट्रोलिंग कर रहा है या लंबे समय से एक ही जगह पर खड़ा है। इसके अलावा, सूचना मिलने के बाद संबंधित 112 वाहन घटनास्थल के लिए रवाना हुआ या नहीं, इसकी भी निगरानी की जा सकेगी। यदि किसी वाहन के मौके पर पहुंचने में देरी होती है या तकनीकी समस्या आती है, तो वरिष्ठ अधिकारी संबंधित पुलिसकर्मियों से तत्काल समन्वय कर सकेंगे।

हर जिले में बनेगा Dial 112 का जिला समन्वय केंद्र

बिहार के सभी जिलों में Dial 112 District Coordination Centre खोलने की तैयारी है। यहां DSP रैंक के अधिकारियों की तैनाती प्रस्तावित है। इन केंद्रों से Dial 112 से जुड़ी घटनाओं की निगरानी की जाएगी। अधिकारी यह भी देखेंगे कि इमरजेंसी कॉल मिलने के बाद संबंधित वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया या नहीं। जरूरत पड़ने पर जिला, अनुमंडल और थाना स्तर के पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय कर कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा।

ERSS के लिए अलग पुलिस बल का प्रस्ताव

ERSS को मजबूत करने के लिए अलग पुलिस बल तैयार करने की भी योजना है। इसके लिए पुलिस मुख्यालय को 40 DSP, 6,000 इंस्पेक्टर और ASI, 17,000 सिपाही तथा 5,500 चालक उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद Emergency Response System को और विस्तार देने की योजना है।

सरकारी बसों का Panic Button भी Dial 112 से जुड़ेगा

बिहार की सरकारी बसों में लगे Panic Button को भी Dial 112 से जोड़ने की तैयारी है। फिलहाल सरकारी बसों में चार पैनिक बटन हैं-एक चालक के पास और तीन यात्रियों की सीटों के आसपास।मौजूदा व्यवस्था में बटन दबने पर संबंधित कमांड सेंटर में अलार्म बजता है। इसके बाद बस के मैनेजर से संपर्क कर स्थिति की जानकारी ली जाती है और जरूरत पड़ने पर संबंधित थाने को सूचना दी जाती है। ERSS ने इस व्यवस्था को सीधे Dial 112 से जोड़ने के लिए परिवहन विभाग को प्रस्ताव भी भेजा है। मंजूरी मिलने पर पैनिक बटन दबाते ही बस की लोकेशन और अलार्म की जानकारी Dial 112 सिस्टम तक पहुंच जाएगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार सबसे नजदीकी 112 वाहन को मौके पर भेजा जा सकेगा।

‘पुलिस दीदी’ को भी Dial 112 से जोड़ने की तैयारी

स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थानों और महिलाओं की अधिक आवाजाही वाले इलाकों में तैनात पुलिस दीदी को भी Dial 112 से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए विशेष आपातकालीन डिवाइस देने की योजना है, ताकि किसी आपात स्थिति में सूचना मिलने के बाद संबंधित पुलिस टीम के साथ तेजी से समन्वय किया जा सके। कुछ जिलों में पुलिस दीदी व्यवस्था को ERSS-112 से जोड़ने की दिशा में काम भी सामने आया है।

1033 और 139 हेल्पलाइन को भी जोड़ने की तैयारी

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की हेल्पलाइन 1033 और रेलवे की हेल्पलाइन 139 को भी Dial 112 सिस्टम से इंटीग्रेट करने की योजना है। इसका उद्देश्य अलग-अलग माध्यमों से मिलने वाली आपात सूचनाओं को एकीकृत व्यवस्था के जरिए संबंधित पुलिस टीम तक पहुंचाना है।

क्या होगा नई व्यवस्था का फायदा ?

Dial 112 के सिस्टम में प्रस्तावित बदलावों के बाद आपात सूचना मिलने से लेकर पुलिस वाहन के घटनास्थल तक पहुंचने तक की प्रक्रिया की वरिष्ठ स्तर पर निगरानी की जा सकेगी। SP और SDPO को रियल-टाइम अलर्ट मिलने, 112 वाहनों की लोकेशन देखने और जिला स्तर पर समन्वय केंद्र बनने से पुलिस रिस्पॉन्स और मॉनिटरिंग को अधिक व्यवस्थित करने का लक्ष्य है। हाल के दिनों में बिहार पुलिस ने भी फील्ड पुलिसिंग, पेट्रोलिंग और अपराध प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है।