पटना, 17 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत बिहार के पात्र भूमिहीन परिवारों के लिए राज्य सरकार ने जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने अधिकारियों से करीब 11 हजार भूमिहीन लाभुकों को घर बनाने के लिए 15 से 30 दिनों के भीतर भूखंड उपलब्ध कराने को कहा है। बिहार सरकार का उद्देश्य यह है कि पात्र परिवारों को आवास योजना का लाभ सिर्फ जमीन उपलब्ध नहीं होने की वजह से न रुकना पड़े। यदि सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हो पाती है तो नियमों के तहत लाभुक को जमीन खरीदने के लिए ₹1 लाख की आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था बताई गई है।

11 हजार भूमिहीन परिवारों को मिलेगा लाभ

ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार, करीब 11 हजार पात्र भूमिहीन लाभुकों को आवास निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से कार्ययोजना तैयार कर निर्धारित समय सीमा में जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इसका मकसद आवास योजना में जमीन की कमी को बड़ी बाधा बनने से रोकना है।

जमीन नहीं मिली तो ₹1 लाख की सहायता

इस पहल में सबसे महत्वपूर्ण बात उन परिवारों के लिए है, जिन्हें सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हो पाती है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ऐसी स्थिति में पात्र लाभुकों को भूखंड खरीदने के लिए ₹1 लाख की सहायता दी जाएगी। यानी पात्र भूमिहीन परिवारों के लिए दो स्तर पर व्यवस्था की जा रही है-पहले सरकारी स्तर पर जमीन उपलब्ध कराने का प्रयास और जमीन उपलब्ध नहीं होने पर नियमानुसार आर्थिक सहायता। हालांकि, ₹1 लाख की सहायता सभी भूमिहीन लोगों के लिए स्वतः नहीं है। इसका लाभ पात्रता और संबंधित सरकारी नियमों के तहत ही मिलेगा।

बिहार में 49 लाख से ज्यादा आवासों का लक्ष्य

ग्रामीण विकास मंत्री के अनुसार, वर्ष 2016 से अब तक बिहार को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत करीब 49 लाख 16 हजार आवासों का लक्ष्य मिला है। इनमें लगभग 43 लाख आवास पूरे हो चुके हैं, जबकि करीब 6 लाख आवासों को पूरा कराने की प्रक्रिया जारी है।

सर्वे में एक करोड़ से ज्यादा नाम, पात्रता पर जांच

आवास योजना से जुड़े सर्वे में बड़ी संख्या में नाम सामने आने के बाद पात्रता को लेकर भी समीक्षा की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में 1 करोड़ 4 लाख 90 हजार से अधिक नाम दर्ज हुए हैं, जबकि वास्तविक पात्र लाभुकों की संख्या करीब 62 से 63 लाख बताई गई है। इस अंतर को लेकर अधिकारियों को जांच और सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं। इसका मतलब है कि सर्वे में नाम होना और योजना के लिए अंतिम रूप से पात्र होना एक ही बात नहीं है। लाभ देने से पहले पात्रता का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।

2026-27 में 11.18 लाख नए घरों का लक्ष्य

बिहार को वित्तीय वर्ष 2026-27 में 11 लाख 18 हजार 937 नए आवासों का लक्ष्य मिलने की जानकारी दी गई है। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आवास निर्माण के साथ स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण और रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों पर भी जोर दे रही है।

भूमिहीन लाभुक क्या करें ?

यदि कोई परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लिए पात्र है लेकिन उसके पास घर बनाने के लिए जमीन नहीं है, तो उसे अपने पंचायत और संबंधित स्थानीय प्रशासन से अपनी पात्रता और जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। आवेदन या लाभ से पहले यह जांचना जरूरी है कि परिवार का नाम संबंधित आवास योजना के रिकॉर्ड में पात्र लाभुक के रूप में दर्ज है या नहीं।

ध्यान रखें

  • ₹1 लाख की सहायता पात्र भूमिहीन लाभुकों के लिए नियमों के अनुसार है।
  • सरकारी जमीन उपलब्ध होने पर पहले भूखंड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया होगी।
  • जमीन उपलब्ध नहीं होने पर भूखंड खरीदने के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान बताया गया है।
  • लाभ से पहले पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा सकता है।
  • स्थानीय स्तर पर आवेदन/सत्यापन की प्रक्रिया के लिए पंचायत या संबंधित ग्रामीण विकास कार्यालय से जानकारी लेना बेहतर होगा।