पटना, 7 सितंबर, 2026 : बिहार के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करोड़ों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के आवासीय मकानों को होल्डिंग टैक्स के दायरे से बाहर रखने की तैयारी कर रही है। अब इसका सीधा फायदा गांवों में रहने वाले उन परिवारों को मिलेगा, जिन्हें मकान पर सालाना टैक्स लगाए जाने की चिंता सता रही थी। इस प्रस्ताव के लागू होने जाने के बाद अब गांव में पक्के और अर्धपक्के आवासीय मकानों पर Holding Tax नहीं लिया जाएगा। राज्य सरकार के इस कदम से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
क्यों लिया गया होल्डिंग टैक्स हटाने का फैसला ?
दरअसल पंचायतों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के टैक्स और शुल्क लगाने का प्रस्ताव सामने आया था। इसमें पक्के और अर्धपक्के मकानों को भी होल्डिंग टैक्स के दायरे में लाने की बात थी, मगर प्रस्ताव सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में इसका विरोध शुरू हो गया। किसान, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का कहना था कि महंगाई के दौर में मकान पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डालना उचित नहीं होगा। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा। इसके बाद सरकार की ओर से नियमों में बदलाव की तैयारी की जा रही है।
आवासीय मकानों को टैक्स से किया जा सकता है बाहर
प्रदेश सरकार के प्रस्तावित बदलाव में Residential Houses को होल्डिंग टैक्स के दायरे से बाहर रखने की बात कही जा रही है। गरीब परिवारों के लिए बनाए गए प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के घरों पर भी इस तरह का टैक्स नहीं लगाने का प्रावधान किया जा सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
फिर पंचायतों की कमाई कैसे बढ़ेगी ?
आवासीय मकानों को टैक्स के दायरे से बाहर रखने के बावजूद पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए सरकार का फोकस Commercial Properties और Business Activities पर हो सकता है। इसके तहत होटल, विवाह भवन, सिनेमा हॉल, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, बड़ी चावल मिल और अन्य व्यावसायिक या संस्थागत भवनों से टैक्स और शुल्क वसूला जा सकता है। यानी सरकार का फोकस हर ग्रामीण घर से टैक्स लेने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों से राजस्व बढ़ाने पर हो सकता है।
15 जुलाई को कैबिनेट ने लिया था फैसला
प्राप्त जानकारी के मुताबिक 15 जुलाई को बिहार कैबिनेट ने ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न टैक्स और शुल्क वसूलने से जुड़े एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि अभी इसका गजट प्रकाशित नहीं हुआ है और पंचायती राज विभाग की ओर से संबंधित अधिसूचना भी जारी नहीं की गई है। ऐसे में प्रस्तावित बदलाव और अंतिम नियमों की स्थिति अधिसूचना जारी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
ग्रामीण परिवारों के लिए क्यों अहम है फैसला ?
गांवों में बड़ी संख्या में परिवार अपने आवासीय मकानों में रहते हैं। ऐसे में घरों पर अतिरिक्त होल्डिंग टैक्स लागू होने से उन पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता था। अगर सरकार आवासीय मकानों को टैक्स से बाहर रखने का फैसला लागू करती है, तो ग्रामीण परिवारों को राहत मिलेगी और पंचायतों के लिए राजस्व जुटाने का रास्ता भी व्यावसायिक संपत्तियों की ओर बढ़ सकता है। फिलहाल ग्रामीणों की नजर सरकार की आधिकारिक अधिसूचना पर है। अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन संपत्तियों को टैक्स से छूट मिलेगी और किन व्यावसायिक भवनों पर टैक्स लगाया जाएगा।




