पटना, 14 सितंबर 2026 : बिहार में जमीन के नीचे छिपे खनिज संसाधनों की तलाश और उनके वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल की तैयारी तेज कर दी गई है। राज्य के खान एवं भूतत्व विभाग ने केंद्र सरकार के सहयोग से आधुनिक तकनीक के जरिए नए खनिज क्षेत्रों की पहचान करने और संभावित खनिज ब्लॉकों को विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। इस पूरी कवायद में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की भूमिका अहम होने वाली है। खनिज अन्वेषण को गति देने के लिए विभाग की GSI अधिकारियों के साथ विशेष बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में बिहार के अलग-अलग इलाकों में मौजूद खनिज संभावनाओं और आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

GSI के साथ होगी अहम बैठक

खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार, GSI के अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक की तारीख जल्द तय की जाएगी। इस बैठक में राज्य के उन क्षेत्रों पर चर्चा होगी, जहां खनिज संसाधनों की संभावनाएं मौजूद हैं, मगर अब तक उनका पर्याप्त वैज्ञानिक सर्वेक्षण नहीं हुआ है। राज्य सरकार का फोकस सिर्फ खनिज की मौजूदगी पता करने पर नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता, मात्रा और संभावित भंडार का वैज्ञानिक आकलन करने पर भी है।

कहां कितना खनिज, होगी वैज्ञानिक जांच

अन्वेषण के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि बिहार के किन इलाकों में किस प्रकार के खनिज उपलब्ध हैं और उनका संभावित भंडार कितना हो सकता है। इससे भविष्य में खनिज ब्लॉकों के विकास और नीलामी की योजना बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक सर्वेक्षण से मिलने वाले आंकड़े खनन क्षेत्र की आगे की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

पहले खोज, फिर विकसित होंगे खनिज ब्लॉक

सरकार की योजना के मुताबिक पहले संभावित क्षेत्रों में वैज्ञानिक अन्वेषण कराया जाएगा। इसके बाद जिन क्षेत्रों में व्यावसायिक रूप से उपयोगी खनिज संसाधन मिलने की संभावना होगी, उन्हें खनिज ब्लॉक के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके बाद योग्य ब्लॉकों को नियमानुसार ई-नीलामी के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।

बड़े खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी पर जोर

बिहार सरकार बड़े खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए Unified Mining Portal के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है। एकीकृत डिजिटल व्यवस्था के जरिए नीलामी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने, बोली प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी को बेहतर बनाने की कोशिश होगी।

निवेश और सरकारी राजस्व बढ़ाने की उम्मीद

खान एवं भूतत्व विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से खनिजों की खोज और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से बिहार के खनन क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। अगर संभावित खनिज भंडार की पहचान होती है और उनका व्यवस्थित तरीके से विकास किया जाता है तो इससे राज्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ सरकारी राजस्व बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

अब आगे क्या होगा ?

फिलहाल सबसे अहम कदम GSI अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बैठक है। इसमें संभावित खनिज क्षेत्रों, सर्वेक्षण और अन्वेषण की प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके बाद वैज्ञानिक अन्वेषण से सामने आने वाले आंकड़ों के आधार पर संभावित खनिज ब्लॉकों के विकास और उनकी ई-नीलामी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। यानी आने वाले समय में बिहार की जमीन के नीचे मौजूद खनिज संभावनाओं का वैज्ञानिक तरीके से पता लगाने से लेकर उन्हें आर्थिक संसाधन में बदलने तक की पूरी प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है।