पटना, 7 सितंबर, 2026 : बिहार के सरकारी शिक्षकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश के सरकारी शिक्षकों की सैलरी को लेकर एक बार फिर मामला गरमा गया है। इस बीच शिक्षक संगठन लगातार 7वें वेतनमान (7th Pay Commission) और पे-मैट्रिक्स लागू करने की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा दिया गया है, तो उन्हें राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों की तरह वेतनमान और संबंधित भत्तों का लाभ भी मिलना चाहिए। जबकि मांगों को लेकर शिक्षकों का विरोध लगातार जारी है। पहले कई शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर काम करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया था। अब शिक्षक संगठनों ने आंदोलन को और तेज करने की तैयारी की है।

7वें वेतनमान से कितनी बढ़ सकती है सैलरी ?

शिक्षकों की मांग अगर सरकार स्वीकार करती है और 7th Pay Scale तथा Pay Matrix लागू किया जाता है, तो उनकी मासिक सैलरी में करीब 15 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। हालांकि, वेतन में बढ़ोतरी होने से राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ेगा। उपलब्ध अनुमान के अनुसार, सरकार को हर साल 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिहार के शिक्षा विभाग के लिए 68,216.95 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। शिक्षा बजट का बड़ा हिस्सा शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े खर्चों पर जाता है।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें क्या हैं ?

बिहार के शिक्षक संगठन सिर्फ 7वें वेतनमान की मांग ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि वेतन और सरकारी कर्मचारियों की सुविधाओं से जुड़ी कई मांगें भी उठा रहे हैं।

  • 7वें वेतन आयोग के अनुसार Pay Matrix लागू किया जाए।
  • सभी श्रेणी के शिक्षकों के लिए समान वेतन व्यवस्था लागू हो।
  • सक्षमता परीक्षा पास शिक्षकों को वरीयता और प्रमोशन का लाभ मिले।
  • सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर महंगाई भत्ता (DA) दिया जाए।
  • शिक्षकों को House Rent Allowance (HRA) का लाभ मिले।
  • यात्रा भत्ता समेत अन्य सरकारी भत्ते दिए जाएं।
  • शिक्षकों के लिए Grade Pay और Pay Level स्पष्ट किया जाए।
  • वेतन संरचना को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए।

2 अक्टूबर से आमरण अनशन की तैयारी

7वें वेतनमान की मांग को लेकर शिक्षक संगठनों का आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है। संगठनों ने 2 अक्टूबर से पटना में आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया है। इस संबंध में सरकार को पत्र भेजकर अपनी मांगों से अवगत कराया गया है। शिक्षकों का कहना है कि राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बाद वेतनमान और सुविधाओं को लेकर लंबे समय तक इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए।

सरकार पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव

अगर सरकार शिक्षकों की सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार करती है तो राज्य के खजाने पर बड़ा अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। खासतौर पर 7th Pay Commission, DA, HRA और दूसरे भत्तों को लागू करने से सरकार के खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इसी वजह से सरकार के सामने एक तरफ शिक्षकों की मांगों को पूरा करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ राज्य के वित्तीय संसाधनों को संतुलित रखने की जिम्मेदारी भी है।

चुनावी समीकरण पर भी पड़ सकता है असर

शिक्षकों का आंदोलन ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें 4 सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ी हैं। ऐसे में शिक्षकों की नाराजगी का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार 7वें वेतनमान और शिक्षकों की दूसरी मांगों पर क्या फैसला लेती है। फिलहाल प्रदेस के शिक्षकों को 7वें वेतनमान के लागू होने को लेकर सरकार के आधिकारिक फैसले का इंतजार है।