रांची, 30 सितंबर 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और झारखंड से जुड़े पांच बंद राज्य निगमों के कर्मचारियों और कामगारों के बकाये को लेकर एक अहम आदेश दिया है। शीर्ष कोर्ट ने संबंधित दैनिक वेतनभोगी कर्मियों और मजदूरों को एकमुश्त एक-एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा लंबित बकाये पर ब्याज का भुगतान भी करने का विशेष रूप से निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राज्यों को निर्देश दिया है कि संबंधित कर्मियों या, जहां लागू हो, उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को निर्धारित राशि और ब्याज का भुगतान तीन महीने के भीतर किया जाए।
ईपीएफ बकाये पर 12 फीसदी ब्याज
कोर्ट ने देर से भुगतान किए जाने वाले ईपीएफ बकाये पर सालाना 12 प्रतिशत साधारण ब्याज देने का निर्देश दिया है। वहीं वेतन, मजदूरी और अन्य मौद्रिक बकाये पर छह प्रतिशत ब्याज देना होगा। ब्याज की गणना संबंधित राशि के देय होने की तारीख से वास्तविक भुगतान की तारीख तक की जाएगी।
चार सप्ताह में कर्मचारियों की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पारदर्शिता के लिए बिहार और झारखंड सरकार को संबंधित कर्मचारियों और कामगारों की अद्यतन जानकारी सार्वजनिक करने का भी निर्देश दिया। इसके साथ ही राज्यों को यह जानकारी अपने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और संबंधित प्रशासनिक विभागों की वेबसाइट पर चार सप्ताह के भीतर प्रकाशित करनी होगी।
बिहार पुनर्गठन अधिनियम से जुड़ा था विवाद
यह मामला बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के बाद बिहार से अलग होकर बने झारखंड से जुड़े पांच बंद राज्य निगमों के कर्मचारियों के वेतन, सेवा संबंधी दावों और अन्य बकाये के बंटवारे से संबंधित था। झारखंड में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट में मामला आने के बाद हाईकोर्ट में संबंधित जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए पांच नवंबर की तारीख निर्धारित की गई है।
598 दैनिक वेतनभोगी कर्मियों का मामला
मामले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बिहार स्टेट कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन के 598 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और कामगारों से संबंधित है। इन कर्मचारियों के बकाये की गणना 1992 से संबंधित कर्मचारी की सेवानिवृत्ति, मृत्यु या सेवा समाप्ति तक 42.50 रुपये प्रतिदिन की दर से की गई थी।बताया गया है कि इनमें से 467 दैनिक वेतनभोगियों को करीब 14.21 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई दशकों तक एक ही दैनिक दर के आधार पर बकाये की गणना करना कतई उचित नहीं माना जा सकता है। इसलिए संबंधित दैनिक वेतनभोगियों को अतिरिक्त एक लाख रुपये की एकमुश्त राशि देने का निर्देश दिया गया है। 598 कर्मचारियों के आधार पर यह अतिरिक्त भुगतान करीब 5.98 करोड़ रुपये तक हो सकता है।
ये पांच निगम हैं शामिल
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़े पांच राज्य स्वामित्व वाले निगमों में शामिल हैं :
- बिहार राज्य निर्माण निगम लिमिटेड
- बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड
- बिहार राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम लिमिटेड
- बिहार राज्य वन विकास निगम लिमिटेड
- बिहार राज्य पंचायती राज वित्तीय निगम लिमिटेड
इन निगमों से जुड़े कर्मचारियों और कामगारों के वेतन, ईपीएफ तथा अन्य मौद्रिक बकाये के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार आगे भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।




