बेतिया, 15 अक्टूबर 2026 : बिहार के बेतिया के एक लाल ने अपने वायलिन वादन से दुनिया में डंका बजा दिया है। इस तरह पश्चिम चंपारण स्थित बेतिया के शास्त्रीय वायलिन वादक डॉ. रंजन कुमार ने अपनी प्रतिभा और संगीत साधना से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान बना ली है। तीन दशकों से अधिक समय से भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित डॉ. रंजन कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में आयोजित एक कार्यक्रम में भी वायलिन वादन कर चुके हैं। इसके अलावा इंग्लैंड, फ्रांस, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, नेपाल और लक्जमबर्ग समेत छह देशों में प्रस्तुति देकर उन्होंने भारतीय संगीत की पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया है।

बेतिया से शुरू हुआ संगीत का सफर

बिहार के लाल डॉ. रंजन कुमार का बचपन बेतिया में बीता। उनके पिता महेश सिन्हा बैंक अधिकारी थे, जबकि मां वीणा प्रसाद ने उनके शुरुआती जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बेतिया के केआर हाई स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 1992 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। संगीत के प्रति उनकी रुचि समय के साथ गंभीर साधना में बदल गई। उन्हें पंडित टीएम पटनायक, पद्म भूषण डॉ. एमएस गोपालकृष्णन और डॉ. श्रीराम परसुराम जैसे प्रतिष्ठित गुरुओं से सीखने का अवसर मिला। इन गुरुओं के मार्गदर्शन में उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और वायलिन वादन की बारीकियों को सीखा।

PM मोदी के कार्यक्रम में भी बिखेरे सुर

डॉ. रंजन कुमार के संगीत करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2019 में आया, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में जाम्बिया के तत्कालीन राष्ट्रपति एडगर सी. लुंगु के सम्मान में आयोजित एक खास कार्यक्रम में वायलिन वादन किया। इसके अलावा जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ की उच्चस्तरीय सहभागिता के दौरान भी उन्होंने सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया। इन आयोजनों में उनकी भागीदारी भारतीय शास्त्रीय संगीत को व्यापक मंचों तक पहुंचाने की उनकी यात्रा का अहम हिस्सा रही है। इस तरह रंजन कुमार अपने वायलिन वादन से दुनियाभर में छा गए।

छह देशों में भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रचार

डॉ. रंजन कुमार भारत के साथ-साथ इंग्लैंड, फ्रांस, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, नेपाल और लक्जमबर्ग में भी अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उनके वादन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा से परिचित होने का अवसर मिला। वह आकाशवाणी और दूरदर्शन के ग्रेडेड कलाकार हैं। इसके साथ ही भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) और संगीत नाटक अकादमी से संबद्ध उच्च श्रेणी के सूचीबद्ध कलाकार भी हैं।

बिहार सरकार समेत कई सम्मान

डॉ. रंजन कुमार को वर्ष 2003 में बिहार सरकार की ओर से सर्वश्रेष्ठ कलाकार के रूप में सम्मानित किया गया था। वर्ष 2011 से 2013 के बीच उन्हें संस्कृति मंत्रालय की ‘संवाद’ परियोजना के लिए अनुदान भी मिला। इसके अतिरिक्त, उन्हें वर्ष 2022 में विदुषी महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान और वर्ष 2025 में इंटरनेशनल जेपी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। बेतिया से शुरू हुआ डॉ. रंजन कुमार का सफर आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंचों तक पहुंच चुका है। उनकी संगीत साधना बिहार की प्रतिभा और भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा की एक प्रेरक कहानी है।