पटना, 11 सितंबर 2026 : पटना समेत पूरे बिहार में शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। बैंकिंग संगठनों के अनुसार राज्य की करीब 3000 सार्वजनिक और निजी बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहेगा। इस हड़ताल में करीब 63 हजार कर्मचारी और अधिकारी शामिल होने की बात कही गई है। बैंक कर्मचारी और अधिकारी पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने समेत कई लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच संगठनों का कहना है कि कुछ मांगों पर पहले सहमति बनने के बावजूद अब तक उनका क्रियान्वयन नहीं हुआ है।

3000 बैंक शाखाओं में प्रभावित रहेगा काम

एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के कारण बिहार की करीब 3000 बैंक शाखाओं में सामान्य कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के संगठनों ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने का दावा किया है। इसका सबसे ज्यादा असर बैंक शाखाओं में होने वाले आमने-सामने के कामकाज पर पड़ सकता है। डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम जैसी सेवाओं की स्थिति संबंधित बैंक की व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

पांच दिन बैंक खोलने की मांग

बैंक कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांग सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करना है। कर्मचारियों का कहना है कि इस मुद्दे पर पहले भी सहमति बनी थी, मगर इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। संगठनों के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं, जबकि बाकी शनिवार को काम होता है।

2015 में शनिवार की छुट्टी को लेकर हुआ था समझौता

स्टेट बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव अमरेश विक्रमादित्य के अनुसार, मई 2015 में हुए समझौते के तहत दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित किया गया था। इसके साथ ही भविष्य में सभी शनिवार को अवकाश देने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही गई थी। बैंक संगठनों का दावा है कि इसके बाद भी यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो सकी।

2024 के वेतन समझौते में भी बनी थी सहमति

बैंक कर्मचारी संगठनों के अनुसार, मार्च 2024 के वेतन समझौते के दौरान शेष शनिवारों को भी छुट्टी देने पर सहमति बनी थी। इसके बदले कर्मचारियों ने सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम करने पर सहमति जताई थी। इस संबंध में वित्त मंत्रालय को अनुशंसा भेजे जाने की बात भी कही गई है।

ढाई साल से लंबित है मामला

बैंक कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अनुशंसा भेजे जाने के बावजूद ढाई साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था को लागू करने का मामला अभी भी लंबित है। इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों में नाराजगी बढ़ने का दावा किया जा रहा है।

भर्ती और पेंशन को लेकर भी मांग

बैंक कर्मचारियों की मांग सिर्फ पांच दिन के कार्य सप्ताह तक सीमित नहीं है। संगठनों की ओर से बैंकिंग क्षेत्र में पर्याप्त क्लेरिकल और सब-स्टाफ की भर्ती की मांग भी की जा रही है। इसके अलावा NPS को OPS में बदलने, पेंशन में सुधार और पेंशन पर महंगाई भत्ता से जुड़ी मांगें भी आंदोलन का हिस्सा हैं।

रिटायर्ड कर्मचारियों के मेडिकल बीमा की मांग

बैंक कर्मचारी संगठनों ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के चिकित्सा बीमा का प्रीमियम बैंक की ओर से वहन करने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा लीव बैंक समेत कई अन्य लंबित मांगों को लेकर भी कर्मचारी संगठन सरकार और बैंक प्रबंधन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

सुलह बैठक में नहीं निकला समाधान

मांगों को लेकर आठ और नौ सितंबर को मुख्य श्रम आयुक्त की मध्यस्थता में सुलह बैठक हुई थी। इस बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हुए। हालांकि, कर्मचारी संगठनों के अनुसार बातचीत के दौरान किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद शुक्रवार को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल का फैसला लिया गया।

26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठनों ने मांगों का समाधान नहीं होने की स्थिति में 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार, वित्त मंत्रालय और बैंक कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत अहम होगी।

ग्राहकों को किन सेवाओं में परेशानी हो सकती है ?

हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं में जमा-निकासी, चेक से जुड़े काम, कैश काउंटर और अन्य शाखा आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, ATM, UPI, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं पूरी तरह बंद होंगी, यह जरूरी नहीं है। इन सेवाओं पर असर संबंधित बैंक की तकनीकी व्यवस्था और उपलब्धता पर निर्भर करेगा।