पटना, 3 अक्टूबर 2026 : झारखंड के अलग होने के बाद बिहार की पहचान लंबे समय तक कृषि प्रधान राज्य के रूप में ही रही है। इसी दौर में एक कहावत भी खूब चर्चित हुई थी-'बाढ़ बिहार को, और दौलत झारखंड को'। मगर अब बिहार की तस्वीर बदलने की उम्मीद जगी है। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की 2021 से 2024 के बीच हुई खोज में रोहतास, जमुई और गया समेत कई इलाकों में बड़ी मात्रा में खनिज संसाधनों की पहचान हुई है। इनकी अनुमानित कीमत 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। हालांकि खनिज मिलना और उसे जमीन से निकालकर उद्योग तथा सरकारी राजस्व में बदलना दो अलग-अलग बातें हैं। बिहार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन संसाधनों को व्यावसायिक खनन तक पहुंचाने की है।

बिहार को सालाना पांच हजार करोड़ से ज्यादा राजस्व की उम्मीद

खनन विभाग के आकलन के मुताबिक, अगर नए खनिज ब्लॉकों का व्यावसायिक विकास सफल रहता है तो बिहार को हर साल पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का खनन राजस्व मिलने की संभावना है।फिलहाल राज्य का खनन राजस्व करीब 3,592 करोड़ रुपये के स्तर पर है, जिसमें बालू और पत्थर जैसे लघु खनिजों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में बड़े खनिज संसाधनों का व्यावसायिक इस्तेमाल बिहार के राजस्व ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। राज्य सरकार ने 2026-27 से खनिज परियोजनाओं को व्यावसायिक गतिविधियों की ओर ले जाने की तैयारी शुरू की है।

रोहतास में ग्लौकोनाइट और चूना पत्थर का बड़ा भंडार

रोहतास जिले में ग्लौकोनाइट और चूना पत्थर के बड़े संसाधनों की पहचान हुई है। पिपराडीह-भुरवा और चुटिया-नौहट्टा ब्लॉक में लगभग 130.11 मिलियन टन ग्लौकोनाइट का अनुमान लगाया गया है। इसकी संभावित कीमत करीब 14,048 करोड़ रुपये बताई गई है। ग्लौकोनाइट से पोटाश प्राप्त किया जा सकता है। पोटाश उर्वरक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण खनिज है और भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू संसाधन मिलने से आयात पर निर्भरता कम करने की संभावना बन सकती है। रोहतास के भोरा-कथरा ब्लॉक में करीब 33 से 39.68 मिलियन टन उच्च गुणवत्ता वाले चूना पत्थर का अनुमान है। इसकी संभावित कीमत लगभग 1,761 करोड़ रुपये बताई गई है। चूना पत्थर का इस्तेमाल सीमेंट और क्विकलाइम समेत कई उद्योगों में होता है।

अमझोर में पाइराइट्स का बड़ा संसाधन

रोहतास का अमझोर क्षेत्र पाइराइट्स के लिए भी जाना जाता है। उपलब्ध आकलनों के मुताबिक, भारत के ज्ञात पाइराइट संसाधनों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में मौजूद है। पाइराइट्स का इस्तेमाल सल्फ्यूरिक एसिड और कई औद्योगिक रासायनिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। इससे बिहार में खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार की संभावना भी बढ़ सकती है।

जमुई में लौह अयस्क से लेकर सोने तक की संभावना

जमुई बिहार के खनिज मानचित्र में तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। यहां मैग्नेटाइट यानी लौह अयस्क के संसाधनों के साथ सोने की मौजूदगी की भी पहचान हुई है। माजोस ब्लॉक में G2 स्तर की खोज के दौरान करीब 48.40 मिलियन टन मैग्नेटाइट का अनुमान लगाया गया है। इसकी संभावित कीमत करीब 3,817 करोड़ से 6,000 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है। भंटा ब्लॉक में G3 स्तर पर करीब 6.49 मिलियन टन मैग्नेटाइट संसाधन का अनुमान है, जिसकी कीमत लगभग 512 करोड़ रुपये आंकी गई है।मैग्नेटाइट का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्टील निर्माण और धातुकर्म उद्योग में किया जाता है।

सोनो में सोने का संसाधन, 2027-28 में ट्रायल प्रोडक्शन का लक्ष्य

जमुई के सोनो क्षेत्र में सोने की मौजूदगी लंबे समय से चर्चा में रही है। उपलब्ध आकलन के अनुसार, करीब 222.88 मिलियन टन सोना-युक्त अयस्क में लगभग 37.6 टन सोना धातु होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि इसे फिलहाल खनिज रिजर्व के बजाय 'शेष संसाधन' की श्रेणी में रखा गया है। शुरुआती खोज के बाद आगे की प्रक्रिया जारी है और 2027-28 में ट्रायल प्रोडक्शन का लक्ष्य है।

गया और जहानाबाद में भी महत्वपूर्ण खनिजों की मौजूदगी

बिहार के गया और जहानाबाद के कुछ इलाकों में भी महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की पहचान की गई है।इन क्षेत्रों में वैनेडियम युक्त मैग्नेटाइट, इल्मेनाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की मौजूदगी सामने आई है। कुछ क्षेत्रों में लिथियम युक्त पेग्मेटाइट की भी पहचान हुई है। इन खनिजों का इस्तेमाल आधुनिक उद्योगों में किया जाता है। वैनेडियम मजबूत स्टील और ऊर्जा भंडारण तकनीक में उपयोगी है, जबकि इल्मेनाइट से टाइटेनियम आधारित उत्पाद तैयार किए जाते हैं। लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स का इस्तेमाल बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन, विंड टर्बाइन और रक्षा तकनीक जैसे क्षेत्रों में होता है। G4 से G1 तक होती है खनिज खोज किसी खनिज संसाधन की पहचान के बाद सीधे खनन शुरू नहीं किया जा सकता। इसके लिए खोज और आकलन के कई चरण होते हैं।

  • G4 : प्रारंभिक सर्वेक्षण
  • G3: प्रारंभिक खोज
  • G2: सामान्य खोज
  • G1: विस्तृत खोज

बिहार में चिन्हित खनिज क्षेत्रों को इन चरणों से आगे बढ़ाकर व्यावसायिक खनन के लिए तैयार किया जा रहा है।

2026 से 2031 तक खनिज परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी

सरकार ने खनिज परियोजनाओं के लिए चरणबद्ध रोडमैप तैयार किया है। इसमें खनिज संसाधनों की खोज से लेकर नीलामी, पर्यावरणीय मंजूरी, माइनिंग प्लान और लीज प्रक्रिया तक कई चरण शामिल हैं।

सरकार की योजना के मुताबिक :

  • 2026-27 में आगे की G2/G1 स्तर की खोज और ड्रिलिंग
  • खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना
  • 2027-28 में सोनो में सोने के ट्रायल प्रोडक्शन की दिशा में काम
  • 2026 से 2031 के बीच विभिन्न खनिज परियोजनाओं को व्यावसायिक खनन की ओर ले जाना

हालांकि, इन समय-सीमाओं का वास्तविक परिणाम जमीन पर परियोजनाओं की प्रगति और आवश्यक मंजूरियों पर निर्भर करेगा।

निवेशकों को आकर्षित करना भी बड़ी चुनौती

खनिज ब्लॉक मिलने के बाद अगली चुनौती निवेशकों को आकर्षित करने की है। शुरुआती खोज में उपलब्ध सीमित आंकड़ों के कारण निजी कंपनियां बड़े निवेश को लेकर सतर्क रहती हैं। इसी जोखिम को कम करने के लिए केंद्र स्तर पर निजी एजेंसियों को खनिज खोज से जोड़ने और शुरुआती चरण के जोखिम को कम करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। बिहार में कुछ खनिज ब्लॉकों की शुरुआती नीलामी में पर्याप्त बोलीदाता नहीं मिलने से प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में दिक्कत भी सामने आई है।

जमीन, तकनीक और पर्यावरणीय मंजूरी बड़ी बाधाएं

बिहार में खनिज परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में कई चुनौतियां हैं। ग्लौकोनाइट से कृषि-ग्रेड पोटाश निकालने और मैग्नेटाइट से वैनेडियम अलग करने जैसी प्रक्रियाओं के लिए उन्नत तकनीक की जरूरत हो सकती है। इसके अलावा कई इलाकों में जमीन का स्वामित्व बड़ी संख्या में निजी लोगों के पास है, जिससे भूमि संबंधी प्रक्रिया जटिल हो सकती है। इसके साथ ही पर्यावरण मंजूरी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति, वन संबंधी स्वीकृति और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं में भी समय लग सकता है।

अवैध खनन रोकने के लिए 'माइंस पुलिस' की तैयारी

खनिज संपदा बढ़ने के साथ उसकी सुरक्षा भी सरकार के लिए अहम हो गई है। बिहार सरकार खनिज क्षेत्रों में अवैध खनन और खनिज संपदा की चोरी रोकने के लिए विशेष बल बनाने की तैयारी कर रही है।राज्य के खनन मंत्री प्रमोद कुमार के अनुसार, एक्साइज पुलिस की तर्ज पर करीब 1,000 कर्मियों वाली विशेष माइंस पुलिस फोर्स तैयार करने की योजना है।

क्या बिहार की अर्थव्यवस्था बदल सकती है?

बिहार के लिए इन खनिज संसाधनों की खोज निश्चित रूप से एक नई आर्थिक संभावना खोलती है। लेकिन 21 हजार करोड़ रुपये के अनुमानित खनिज संसाधन का मतलब 21 हजार करोड़ रुपये का तत्काल सरकारी राजस्व नहीं है। इन संसाधनों को वास्तविक आर्थिक लाभ में बदलने के लिए नीलामी, निवेश, तकनीक, भूमि, पर्यावरणीय मंजूरी, बुनियादी ढांचे और खनिज आधारित उद्योगों की जरूरत होगी। अगर ये प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक आगे बढ़ती हैं, तो खनिज क्षेत्र बिहार के लिए राजस्व, रोजगार और औद्योगिक विकास का नया आधार बन सकता है। यानी सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि बिहार में कितना खनिज मिला है, बल्कि असली सवाल यह है कि इन संसाधनों को जमीन से निकालकर रोजगार, उद्योग और राजस्व में कितनी तेजी से बदला जा सकता है।