दानापुर, 6 सितंबर। पटना के दानापुर दियारा क्षेत्र में बाढ़ के बीच एक महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल ले जाने के दौरान परिजनों को एंबुलेंस या शव वाहन नहीं मिला। इसके बाद परिजन शव को गोद में लेकर पीपा पुल घाट से पैदल अस्पताल पहुंचे। घटना की तस्वीर और वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है।
बाढ़ के पानी में डूबने से हुई महिला की मौत
मृतका की पहचान शाहपुर निवासी बंटी यादव की पत्नी संगीता देवी के रूप में हुई है। बताया गया कि वह अपनी दादी के श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दियारा क्षेत्र के हवासपुर गांव गई थीं। इसी दौरान बाढ़ के पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने काफी देर तक तलाश की। प्रयास के बाद शव बरामद हुआ और उसे नाव के जरिए पीपा पुल घाट तक लाया गया।
एंबुलेंस का इंतजार करते रहे परिजन
परिजनों के अनुसार, शव को अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की मांग की गई थी। काफी देर इंतजार के बावजूद वाहन नहीं पहुंचा। अस्पताल की दूरी पीपा पुल घाट से आधा किलोमीटर से भी कम बताई जा रही है। इसके बाद परिजनों ने शव को गोद में उठाकर पैदल अस्पताल पहुंचने का फैसला किया।
पांच दिनों से बाढ़ की चपेट में दियारा क्षेत्र
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के मुताबिक, दानापुर दियारा क्षेत्र पिछले करीब पांच दिनों से बाढ़ से प्रभावित है। पानी बढ़ने के कारण आवागमन, इलाज और दूसरी जरूरी सेवाओं तक पहुंच में लोगों को परेशानी हो रही है। ऐसे में आपात स्थिति में परिवहन सुविधा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन ने आरोप से अलग बताई स्थिति
अनुमंडलीय अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. निभा मोहन ने बताया कि उनके पास शव लाने के लिए एंबुलेंस की मांग का फोन नहीं आया था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में 102 एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं है। उनके अनुसार, दो शवों के पोस्टमार्टम के बाद शव वाहन भेजा गया था।
एंबुलेंस को लेकर जांच से साफ होगी तस्वीर
इस मामले में परिजनों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि एंबुलेंस के लिए संपर्क किया गया था, जबकि अस्पताल प्रशासन इससे इनकार कर रहा है। ऐसे में वास्तव में एंबुलेंस की मांग कब की गई और मौके पर वाहन क्यों नहीं पहुंचा, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। घटना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर बहस जरूर छेड़ दी है।




