पटना, 26 अक्टूबर 2026 : बिहार की राजनीति में मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर हलचल काफी तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अब अनंत सिंह की विधायकी पर सबकी नजर टिक गई है। इस बीच जेडीयू ने उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश भी कर दी है, मगर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र मिलने के बाद ही मामले की समीक्षा कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अनंत सिंह की विधायिकी को लेकर भले ही हलचल तेज हो गई है, मगर उनकी विधायिकी पर कोई संकट नहीं होने वाला है। क्योंकि महज पार्टी की सिफारिश पर यह कार्रवाई नहीं की सकती है। राजनीतिक बयान के अलावा इस मामले में कोई खास कार्रवाई की नहीं की जा सकती है।

विधानसभा अध्यक्ष को आधिकारिक पत्र का इंतजार

मोकामा के विधायक अनंत सिंह की विधायकी समाप्त करने की जेडीयू की सिफारिश पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि समाचार पत्रों के माध्यम से उन्हें अनंत सिंह के पार्टी से निष्कासन की जानकारी मिली है, लेकिन बिहार विधानसभा कार्यालय को इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। विधानसभा अध्यक्ष के मुताबिक, आधिकारिक पत्र प्राप्त होने के बाद मामले की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद संवैधानिक प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में फिलहाल अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

JDU ने अनंत सिंह को छह साल के लिए किया निष्कासित

जनता दल यूनाइटेड ने मोकामा विधायक अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी ने पूर्व विधायक नीलम देवी को भी छह साल के लिए निष्कासित करने का फैसला लिया है। जेडीयू ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से सिफारिश भी की है। पार्टी की ओर से इस मामले में संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला दिया गया है। हालांकि, पार्टी से निष्कासन और विधानसभा की सदस्यता समाप्त होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। अनंत सिंह की विधायकी पर अंतिम निर्णय निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

MLC चुनाव में पार्टी लाइन से अलग जाने पर हुई कार्रवाई

अनंत सिंह के खिलाफ जेडीयू की कार्रवाई को बिहार विधान परिषद चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव के दौरान अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के विरोध में नजर आए थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह का समर्थन किया और उनके पक्ष में प्रचार भी किया।इस दौरान अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच बयानबाजी भी हुई थी। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी के निर्देशों की अवहेलना से जुड़ा मामला माना। इसके बाद जेडीयू नेतृत्व ने अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई का फैसला लिया।

पार्टी के आदेश में क्या लगाए गए आरोप ?

जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी कार्यालय आदेश में विधायक अनंत सिंह पर पार्टी के निर्देशों की लगातार अवहेलना करने का आरोप लगाया गया है। आदेश में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अमर्यादित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का भी उल्लेख है। इसके अलावा विधान परिषद चुनाव में जेडीयू उम्मीदवार के खिलाफ काम करने और दूसरे दल के उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करने का आरोप भी लगाया गया है। पार्टी ने इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने और छह साल के लिए निष्कासित करने का फैसला लिया।

क्या अनंत सिंह की विधायकी चली जाएगी ?

फिलहाल इस सवाल का जवाब विधानसभा अध्यक्ष की समीक्षा और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। जेडीयू की ओर से सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश किए जाने के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष को अभी तक आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। पत्र मिलने के बाद मामले की समीक्षा की जाएगी और लागू नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अनंत सिंह की विधायकी निश्चित रूप से समाप्त हो जाएगी। विधायक अनंत सिंह की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ गई हैं, मगर उनकी विधानसभा सदस्यता पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। अब सबकी नजर जेडीयू की औपचारिक सिफारिश और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की आगे की कार्रवाई पर टिक गई है।