पटना, 6 सितंबर। बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई बड़े एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर पर काम चल रहा है। राज्य में प्रस्तावित और निर्माणाधीन पांच प्रमुख परियोजनाओं से एक जिले से दूसरे जिले के साथ पड़ोसी राज्यों तक सफर आसान होने की उम्मीद है। बेहतर सड़क नेटवर्क से किसानों को बाजार तक पहुंच, कारोबारियों को तेज माल ढुलाई और उद्योगों को नई कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।

बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे सबसे लंबा कॉरिडोर

बक्सर से भागलपुर के बीच करीब 336 किलोमीटर लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है। इसके निर्माण पर करीब 3,700 से 3,750 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह 13 जिलों से होकर गुजरने की योजना है।

बक्सर में यह उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ सकता है। इससे दक्षिण बिहार के साथ यूपी, बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों की ओर आवाजाही सुगम होने की उम्मीद है।

आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा उत्तर बिहार

करीब 170 से 189 किलोमीटर के इस कॉरिडोर से औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा जैसे क्षेत्र जुड़ेंगे। बोधगया और राजगीर को जोड़ने के लिए संपर्क सड़क का प्रस्ताव भी चर्चा में है।

परियोजना पूरी होने पर गया-दरभंगा और पटना-दरभंगा यात्रा समय घटने की उम्मीद है, जिससे पर्यटन और स्थानीय कारोबार को फायदा हो सकता है।

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे से घटेगा सफर का समय

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना है। इसकी लंबाई करीब 245-250 किलोमीटर बताई गई है और 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।

परियोजना में पुल, इंटरचेंज, रेलवे ओवरब्रिज और अंडरपास जैसी सुविधाएं शामिल हैं। पूर्णिया एयरपोर्ट को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

रक्सौल-हल्दिया से बढ़ेगा व्यापार

नेपाल सीमा के पास रक्सौल से पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक करीब 585-600 किलोमीटर का प्रस्तावित 6-लेन एक्सप्रेसवे बिहार के बड़े हिस्से से गुजर सकता है। इससे माल ढुलाई और बंदरगाह तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।

गोरखपुर-सिलीगुड़ी से पूर्वोत्तर तक तेज कनेक्टिविटी

गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का बिहार में करीब 416 किलोमीटर हिस्सा प्रस्तावित है। यह पश्चिम चंपारण से किशनगंज तक कई जिलों को जोड़ते हुए यूपी और पश्चिम बंगाल के बीच तेज सड़क संपर्क विकसित करेगा। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 37,465 करोड़ रुपये बताई गई है।

रोजगार और कारोबार को मिल सकता है फायदा

इन परियोजनाओं के पूरा होने पर बिहार में यात्रा समय घटने के साथ लॉजिस्टिक्स, कृषि, पर्यटन, उद्योग और स्थानीय कारोबार को फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजनाओं की अंतिम लागत, समयसीमा और निर्माण स्थिति संबंधित सरकारी स्वीकृतियों और आधिकारिक अपडेट के अनुसार बदल सकती है।