लखनऊ, 30 अगस्त। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने राज्य में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी प्रमुख चिराग पासवान की नजर दलित मतदाताओं के साथ-साथ ब्राह्मण समुदाय के एक हिस्से को अपने साथ जोड़ने पर है। इसके लिए संगठन विस्तार, दलित चौपाल और सामाजिक संवाद जैसे कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
दलित वोट बैंक में जगह बनाने की कोशिश
उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के कमजोर पड़ने को लोजपा (रामविलास) दलित राजनीति में संभावित अवसर के तौर पर देख रही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इसी उद्देश्य से पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में दलित चौपाल आयोजित की जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश में दलित आबादी करीब 21 प्रतिशत बताई जाती है। जाटव के बाद पासी समुदाय प्रमुख दलित समूहों में शामिल है। लोजपा (आर) पासी और पासवान समुदाय को अपने संभावित मजबूत सामाजिक आधार के रूप में देख रही है।
पूर्वांचल और सेंट्रल यूपी पर खास फोकस
पार्टी ने संगठन विस्तार के लिए पूर्वांचल और सेंट्रल यूपी को प्राथमिकता दी है। बूथ स्तर पर समितियां गठित करने और स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया जारी है।
पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, पूर्वांचल में लोजपा (आर) के पास दो लाख से अधिक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क होने का दावा किया जा रहा है। बिहार से सटे होने के कारण पार्टी को पूर्वांचल में विस्तार की संभावनाएं भी अधिक नजर आ रही हैं।
ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की रणनीति
लोजपा (आर) की रणनीति सिर्फ दलित वोट तक सीमित नहीं है। पार्टी ब्राह्मण समुदाय के साथ भी संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में विभिन्न जिलों में मंदिरों के आसपास ‘चाणक्य चौपाल’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात सामने आई है।
पार्टी का उद्देश्य ब्राह्मण समुदाय के साथ राजनीतिक और सामाजिक संवाद बढ़ाकर अपने आधार को व्यापक बनाना है।
‘पंडित-पासी-पासवान’ पर जोर
उत्तर प्रदेश में पार्टी की रणनीति को ‘पंडित-पासी-पासवान’ सामाजिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल में लोजपा की एक जनसभा में इसी तरह का नारा भी सामने आया था।
इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हुई कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर सकती है। हालांकि, चुनाव में पार्टी कितनी सीटों पर उतरेगी या किसी गठबंधन का हिस्सा बनेगी, इस पर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है।
मायावती के आधार को चुनौती देने की कोशिश?
लोजपा (आर) की सक्रियता को उत्तर प्रदेश में मायावती के दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी खुद को दलित राजनीति में एक नए विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है।
चिराग पासवान की यह रणनीति कितनी प्रभावी होगी, यह 2027 के चुनाव में ही स्पष्ट होगा। फिलहाल संगठन विस्तार और सामाजिक समीकरणों को साधने की कवायद ने यूपी की चुनावी राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।




