पटना, 12 अगस्त 2026 : बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य में इस साल यानी 2026 में पंचायत चुनाव होने की संभावना काफी कम होती दिख रही है। चुनाव से पहले पंचायतों और वार्डों का परिसीमन किया जाना है, जिसकी प्रक्रिया में ही 6 महीने से ज्यादा समय लगने का अनुमान है। इसके बाद आरक्षण रोस्टर, मतदाता सूची और मतदान केंद्रों की तैयारी जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। ऐसे में पंचायत चुनाव अब 2027 में होने की संभावना बढ़ गई है।

2026 में पंचायत चुनाव पर क्यों मंडरा रहा संकट ?

बिहार में पंचायत चुनाव कराने से पहले पंचायतों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण यानी परिसीमन जरूरी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जरूरी दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे और इसके बाद जिलों में डीएम की निगरानी में परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पूरी प्रक्रिया में छह महीने से अधिक समय लगने की संभावना है। इसके बाद चुनाव की अन्य तैयारियां पूरी करने में भी कई महीने लगेंगे।

परिसीमन के बाद होंगे ये बड़े काम

पंचायतों की नई सीमाएं तय होने के बाद चुनाव की तैयारी का अगला चरण शुरू होगा। इसमें मुख्य रूप से : नया आरक्षण रोस्टर तैयार होगा, नई मतदाता सूची तैयार की जाएगी, मतदान केंद्र तय किए जाएंगे, पंचायत और वार्ड से जुड़े रिकॉर्ड अपडेट होंगे, आपत्तियों और सुझावों का निपटारा किया जाएगा। इन सभी प्रक्रियाओं में करीब 6 महीने और लग सकते हैं। यानी परिसीमन से लेकर चुनाव की अंतिम तैयारी तक लगभग एक साल का समय लग सकता है।

2011 की जनगणना के आधार पर बदलेगा पंचायतों का नक्शा

पंचायतों के परिसीमन में 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। आबादी और भौगोलिक स्थिति के आधार पर ग्राम पंचायत, प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों की सीमाएं तय की जाएंगी। यह प्रक्रिया बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत पूरी की जाएगी।

लोगों को आपत्ति और सुझाव देने का भी मिलेगा मौका

परिसीमन का प्रारूप तैयार होने के बाद इसकी जानकारी सरकारी गजट में प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद आम लोगों और संबंधित क्षेत्रों को अपनी आपत्ति और सुझाव दर्ज कराने का अवसर भी मिलेगा। प्राप्त आपत्तियों की जांच के बाद जरूरी बदलाव किए जाएंगे और फिर परिसीमन को अंतिम रूप दिया जाएगा। उसके बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ होगी।

डीएम की होगी अहम भूमिका

राज्य निर्वाचन आयोग पूरे राज्य के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा, जबकि जिलों में परिसीमन का काम जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी की निगरानी में कराया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत गांवों के नक्शे, आबादी और मतदाताओं से जुड़े आंकड़ों को भी व्यवस्थित किया जाएगा।

परिसीमन के बाद बदलेगा आरक्षण का गणित

नई पंचायत सीमाएं तय होने के बाद अलग-अलग पंचायत पदों के लिए नया आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा। इसमें SC, ST, EBC और महिलाओं के लिए आरक्षण की स्थिति तय होगी। इसका असर संभावित पंचायत चुनाव उम्मीदवारों पर भी पड़ेगा। परिसीमन और आरक्षण के बाद यह साफ होगा कि कौन सी सीट सामान्य रहेगी और कौन सी सीट आरक्षित होगी।

दिसंबर 2026 में खत्म होगा मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल

बिहार में मौजूदा पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म होना है। पिछली बार राज्य में पंचायत चुनाव 2021 में कराए गए थे। लेकिन इस बार परिसीमन, आरक्षण, मतदाता सूची और मतदान केंद्रों की तैयारी में लगने वाले समय को देखते हुए 2026 में चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा परिस्थितियों में 2027 में पंचायत चुनाव होने की संभावना ज्यादा दिख रही है।