मुंगेर | 8 जुलाई 2026
बिहार के मुंगेर जिले के तारापुर निवासी मोहम्मद सद्दाम को आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामले में पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बिहार एटीएस, दिल्ली पुलिस और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां अब उसे रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की तैयारी कर रही हैं। जांच का मुख्य फोकस उसके संपर्क, गतिविधियों और संभावित नेटवर्क की गहराई तक पहुंचना है।
मोबाइल फोन और डिजिटल डेटा होंगे जांच का सबसे बड़ा आधार
जांच एजेंसियों की नजर अब सद्दाम के मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड पर है। पुलिस मोबाइल की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि चैट हिस्ट्री, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सोशल मीडिया गतिविधियां और अन्य डिजिटल साक्ष्य पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
पाकिस्तानी गैंगस्टर से लंबे समय से संपर्क की आशंका
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सद्दाम का पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर शहजाद भट्टी से कई वर्षों से ऑनलाइन संपर्क था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों के बीच बातचीत केवल सोशल मीडिया तक सीमित थी या इसके जरिए किसी बड़े नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था।
युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने की भी जांच
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि सद्दाम केवल खुद ही इस नेटवर्क का हिस्सा नहीं था, बल्कि अन्य युवाओं को भी जोड़ने की कोशिश कर रहा था। फिलहाल पुलिस यह पता लगा रही है कि उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। हालांकि अभी तक स्थानीय स्तर पर किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
परिवार और सामाजिक दायरे की भी हो रही पड़ताल
जांच में यह भी सामने आया है कि सद्दाम के पिता पिछले लगभग 20 वर्षों से मुंबई में दर्जी का काम करते हैं और उसका भाई भी वहीं रहता है। पुलिस परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि उसकी गतिविधियों में बदलाव कब और कैसे आया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सद्दाम का गांव में कोई विशेष मित्र मंडली नहीं थी और वह अधिकांश समय मोबाइल व इंटरनेट के माध्यम से बाहरी लोगों के संपर्क में रहता था।
रिमांड और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद सामने आ सकती हैं नई कड़ियां
तारापुर एसडीपीओ कुमार देवेंद्र ने बताया कि मामले की जांच राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी दिल्ली पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल की फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल डेटा और रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच जारी है।




