नई दिल्ली/पुणे | 9 जुलाई 2026
करीब दो दशक पुराने 5.58 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में पुणे स्थित विशेष CBI अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो कारोबारियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने चंद्रकांत एस. लोधा एंड कंपनी के मालिक चंद्रकांत लोधा और ठक्कर एंड संस के मालिक परेश ठक्कर को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। अदालत ने यह फैसला 6 जुलाई 2026 को सुनाया।
2001 में दर्ज हुआ था मामला
CBI के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 9 अक्टूबर 2001 को तत्कालीन स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद की शिकायत के बाद हुई थी। आरोप था कि दोनों कारोबारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने की साजिश रची। शिकायत मिलने के बाद CBI ने मामले की जांच शुरू की।
चेक क्लियर होने से पहले निकाली गई रकम
जांच में सामने आया कि चंद्रकांत लोधा ने परेश ठक्कर की फर्म के खाते से जारी 18 उच्च मूल्य (हाई-वैल्यू) चेक, जिनकी कुल राशि लगभग 6.75 करोड़ रुपये थी, बैंक में जमा कराए। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने चेक क्लियर होने का इंतजार किए बिना ही खाते से बड़ी रकम निकालने की अनुमति दे दी।
CBI के मुताबिक, इसी का फायदा उठाकर चंद्रकांत लोधा ने अपने और अपनी अन्य फर्मों ए.सी. एंटरप्राइजेज तथा अक्षय ट्रेडर्स के नाम से चेक जारी कर करोड़ों रुपये निकाल लिए। इस पूरी प्रक्रिया से बैंक को करीब 5.58 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ।
23 साल बाद आया अदालत का फैसला
जांच पूरी होने के बाद CBI ने 28 अगस्त 2003 को शाखा प्रबंधक बी.आर. डगड़े, सहायक प्रबंधक वी.एल. काले, चंद्रकांत लोधा और परेश ठक्कर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। वर्ष 2025 में CBI अदालतों के पुनर्गठन के बाद यह मामला नासिक से पुणे स्थानांतरित कर दिया गया।
लंबी सुनवाई के बाद विशेष CBI अदालत ने दोनों कारोबारियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। वहीं, तत्कालीन शाखा प्रबंधक बी.आर. डगड़े और सहायक प्रबंधक वी.एल. काले को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर सभी आरोपों से बरी कर दिया।




