पटना, 22 अगस्त 2026 : बिहार की राजधानी पटना में PhD होल्डर्स और अतिथि सहायक प्राध्यापकों का आंदोलन शनिवार को और तेज हो गया। 19 दिनों से आमरण अनशन कर रहे प्रदर्शनकारी लोकभवन मार्च के लिए निकले। आर ब्लॉक चौराहे के पास पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए डबल लेयर बैरिकेडिंग की। मगर प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश भी की। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनातनी की स्थिति बन गई। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल, मजिस्ट्रेट, वाटर कैनन और रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया।

बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, कुछ को पुलिस ने हिरासत में लिया

आर ब्लॉक चौराहे पर प्रदर्शनकारियों को लोकभवन की ओर जाने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग को तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन और तनातनी की स्थिति बनी रही। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी पीछे हट गए। वहीं, कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस ने पटना जंक्शन से आर ब्लॉक जाने वाले रास्ते को भी बंद कर दिया था।

19 दिन से अनशन पर कुमुद पटेल, व्हीलचेयर से पहुंचे प्रदर्शन में

अपनी मांगों को लेकर 19 दिनों से आमरण अनशन कर रहे कुमुद पटेल भी व्हीलचेयर से प्रदर्शन में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भावुक होकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि वह मर जाएं। उनका कहना है कि लंबे समय से आंदोलन के बावजूद सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही है।

PhD होल्डर्स की क्या हैं मांगें ?

प्रदर्शनकारी प्रोफेसर व अतिथि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में UGC के नियमों का पालन, उम्र सीमा बढ़ाने और राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित नए नियमों का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई अतिथि सहायक प्राध्यापक करीब आठ वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें शुरुआत में 11 महीने के लिए नियुक्त किया गया था, लेकिन लगातार वर्षों तक काम लेने के बावजूद अब उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

'सरकार उच्च शिक्षा को खराब करने पर तुली है'

प्रदर्शन में शामिल डॉक्टर निखिल कुमार ने कहा कि वे अतिथि सहायक शिक्षक हैं और उनके ऊपर हमेशा नौकरी जाने का खतरा बना रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था को खराब करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल उनके लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए लोकभवन मार्च कर रहे हैं।

'8 साल से पढ़ा रहे, अब निकालना चाहते हैं'

असिस्टेंट गेस्ट प्रोफेसर डॉ. नितिन कुमार ने कहा कि अतिथि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति 11 महीने के लिए हुई थी, लेकिन वे करीब 8 वर्षों से लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन अब उन्हें हटाने की कोशिश की जा रही है।

चिराग पासवान ने भी किया था समर्थन

PhD होल्डर्स के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। चिराग पासवान ने पहले प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से गेस्ट फैकल्टी को प्राथमिकता देने की मांग की थी। आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्हें सरकार से स्पष्ट नीति और भविष्य की सुरक्षा की जरूरत है।

आर ब्लॉक पर 100 से ज्यादा जवान तैनात

लोकभवन मार्च को देखते हुए पटना प्रशासन ने आर ब्लॉक से लेकर लोकभवन तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। आर ब्लॉक चौराहे पर 100 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात किए गए। इसके अलावा आसपास के चौक-चौराहों पर भी पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर वाटर कैनन और रैपिड एक्शन फोर्स भी मौजूद रही। फिलहाल प्रदर्शनकारियों का प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा है। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से इस आंदोलन को लेकर क्या कदम उठाया जाता है।