पटना | 17 जुलाई 2026

बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया के कारण चुनाव अगले वर्ष तक टल सकते हैं। हालांकि इन अटकलों पर विराम लगाते हुए पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि सरकार का फिलहाल पंचायत चुनाव टालने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी गंभीरता से चुनाव आयोग और संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर इसी वर्ष के अंत तक पंचायत चुनाव कराने की दिशा में काम कर रही है।

36 साल बाद होगा पंचायतों का परिसीमन

मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की सीमाओं का नए सिरे से परिसीमन कराने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। यह परिसीमन वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। पिछले लगभग 36 वर्षों में पंचायतों की सीमाओं का व्यापक पुनर्गठन नहीं हुआ है, जबकि इस दौरान कई क्षेत्रों की आबादी और भौगोलिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। सरकार का उद्देश्य नई आबादी के अनुसार पंचायतों का संतुलित पुनर्गठन करना है, ताकि सभी क्षेत्रों को समान प्रतिनिधित्व मिल सके।

अगले साल चुनाव टलने की खबरों को बताया भ्रामक

हाल के दिनों में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अगस्त 2026 से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होकर अप्रैल 2027 तक चलेगी और उसके बाद आरक्षण निर्धारण के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे। इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि ऐसी कोई आधिकारिक योजना सरकार के स्तर पर नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव अगले साल टालने का निर्णय नहीं लिया गया है और सरकार समय पर चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

नए परिसीमन से मिलेगा बेहतर प्रतिनिधित्व

सरकार का मानना है कि परिसीमन के बाद पंचायतों की सीमाएं वर्तमान जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति के अनुरूप तय होंगी। इससे पंचायतों में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बेहतर होगा, विकास योजनाओं का समान वितरण संभव होगा और स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी।

2021 की स्थिति से अलग हैं मौजूदा हालात

मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के कारण पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर नहीं हो सके थे और विशेष परिस्थितियों में चुनाव आगे बढ़ाने पड़े थे। लेकिन इस बार ऐसी कोई असाधारण स्थिति नहीं है। इसलिए सरकार की प्राथमिकता तय समय पर पंचायत चुनाव संपन्न कराना है। उन्होंने कहा कि चुनाव को लेकर भ्रम फैलाने वाली खबरों पर ध्यान देने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए।