पटना, 22 अगस्त 2026 : बिहार की वरिष्ठ कत्थक कलाकार और गुरु डॉ. रमा दास को इस वर्ष के पंडित सियाराम तिवारी लाइफटाइम अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। नाद विस्तार की ओर से 23 अगस्त 2026 को पटना में आयोजित ध्रुपद संध्या के दौरान उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जाएगा। डॉ. रमा दास बिहार की वरिष्ठतम कत्थक कलाकारों और गुरुओं में शामिल हैं। करीब पांच दशकों से अधिक समय से वह कत्थक नृत्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं और बिहार की सांस्कृतिक पहचान को देशभर में मजबूत करने में योगदान देती रही हैं।
1972 में शुरू हुई थी कला यात्रा
डॉ. रमा दास ने वर्ष 1972 में पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर शताब्दी समारोह से अपने मंचीय जीवन की शुरुआत की थी। इस कार्यक्रम में उन्होंने पद्म विभूषण यामिनी कृष्णमूर्ति और पद्म विभूषण किशोरी अमोनकर जैसी दिग्गज कलाकारों के साथ मंच साझा किया था। इसके बाद से वह लगातार कत्थक के क्षेत्र में सक्रिय रहीं और देश के विभिन्न प्रतिष्ठित सांस्कृतिक समारोहों में अपनी प्रस्तुतियां दीं।
कई प्रतिष्ठित सम्मानों से हो चुकी हैं सम्मानित
कत्थक के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए डॉ. रमा दास को कई सम्मान मिल चुके हैं। इनमें अंबपाली पुरस्कार (बिहार सरकार), सिंगार मणि (सुर सिंगार संसद, मुंबई), स्वर साधना समिति सम्मान (मुंबई) और बिहार गौरव अवॉर्ड प्रमुख हैं। कलाकार के साथ गुरु के रूप में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी कई शिष्याएं आज दिल्ली, छत्तीसगढ़ और झारखंड सहित विभिन्न स्थानों पर कत्थक के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।
कत्थक पर शोध और अकादमिक योगदान
डॉ. रमा दास ने कत्थक नृत्य के क्षेत्र में शोध कार्य भी किया है। वह कत्थक केंद्र, दिल्ली सहित विभिन्न सेमिनारों और सांस्कृतिक मंचों पर कत्थक से जुड़ी चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार साझा करती रही हैं। उनका योगदान केवल मंचीय प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देने और कत्थक की परंपरा को आगे बढ़ाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
सियाराम तिवारी से रहा पारिवारिक संबंध
सम्मान की घोषणा पर डॉ. रमा दास ने खुशी जताते हुए कहा कि यह उनके लिए विशेष प्रसन्नता का अवसर है, क्योंकि उन्होंने पंडित सियाराम तिवारी के साथ कई कार्यक्रमों में मंच साझा किया था।उन्होंने बताया कि चेतना समिति की ओर से आयोजित विद्यापति पर्व समारोह में दोनों अक्सर आमंत्रित होते थे। पटना के बाहर होने वाले कार्यक्रमों के लिए कई बार दोनों ने साथ यात्रा भी की। इस दौरान उनके बीच कला और अन्य विषयों पर लंबी बातचीत होती थी। डॉ. रमा दास के मुताबिक, सियाराम तिवारी का उनके परिवार से भी आत्मीय संबंध था और उनका घर आना-जाना रहा था। ऐसे में उनके नाम पर मिलने वाला यह सम्मान उनके लिए सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि एक पुराने आत्मीय संबंध की याद को और मधुर बनाने वाला अवसर है। 23 अगस्त को पटना में होने वाली ध्रुपद संध्या में डॉ. रमा दास को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।




