पटना | 17 जुलाई 2026
बिहार सरकार ने किशनगंज एयरपोर्ट के रनवे विस्तार को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने एयरपोर्ट विस्तार के लिए करीब 24.11 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना केवल बुनियादी ढांचे के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'चिकन नेक' (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) क्षेत्र की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई मानी जा रही है। इसी कारण भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आपात प्रावधानों के तहत पूरी की जाएगी, ताकि परियोजना में किसी प्रकार की देरी न हो।
आपात प्रावधान के तहत होगी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस प्रोजेक्ट में सामान्य भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया लागू नहीं होगी। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम-2013 की धारा 40 के तहत विशेष प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए सामाजिक प्रभाव आकलन और लंबी आपत्ति प्रक्रिया से छूट दी जाएगी। इससे रनवे विस्तार का कार्य तेजी से शुरू हो सकेगा।
30 दिनों में मिलेगा 80 प्रतिशत मुआवजा
सरकार के निर्देश के अनुसार, अधिग्रहण की नोटिस जारी होने के बाद प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों को 30 दिनों के भीतर मुआवजे का 80 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। भुगतान के बाद प्रशासन नियमानुसार संबंधित भूमि का कब्जा लेगा। सरकार का कहना है कि मुआवजा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और सभी भूमि अभिलेखों को पहले अपडेट किया जाएगा।
पुनर्वास के लिए बनेगी विशेष टीम
भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति बनाई जाएगी, जो पुनर्वास और मुआवजे का आकलन करेगी। सरकार का लक्ष्य है कि भूमि अधिग्रहण के तीन महीने के भीतर पुनर्वास प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाए।
सुरक्षा और कनेक्टिविटी दोनों को मिलेगा लाभ
सरकार का मानना है कि रनवे विस्तार से न केवल किशनगंज एयरपोर्ट की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चिकन नेक क्षेत्र की सुरक्षा और आपातकालीन संचालन क्षमता भी मजबूत होगी। परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर-पूर्व भारत से जुड़ी हवाई कनेक्टिविटी को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।




