पटना | 16 जुलाई 2026
बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को लगातार झटके लग रहे हैं। बुधवार को कई प्रमुख नेताओं के भाजपा में शामिल होने के बाद गुरुवार को भी दो और बड़े चेहरों के पार्टी छोड़ने की खबर सामने आई है। फिल्म निर्माता चेतना झांब और फतुहा की प्रखंड प्रमुख श्रुति श्री के भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेने की चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि उपचुनाव से पहले यह घटनाक्रम जन सुराज के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
आज BJP में शामिल हो सकती हैं चेतना झांब और श्रुति श्री
सूत्रों के अनुसार, चेतना झांब और श्रुति श्री गुरुवार को भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगी। दोनों नेताओं की पहचान अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय सामाजिक और राजनीतिक चेहरों के रूप में रही है। ऐसे में उनका भाजपा में जाना जन सुराज की संगठनात्मक मजबूती पर असर डाल सकता है।
केसी सिन्हा समेत कई नेताओं ने छोड़ा जन सुराज
इससे पहले बांकीपुर सीट से जन सुराज के पूर्व उम्मीदवार प्रो. केसी सिन्हा ने भाजपा का दामन थाम लिया था। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। उनके साथ दीघा के पूर्व प्रत्याशी बिट्टू सिंह, मनेर के पूर्व प्रत्याशी गोपाल सिंह सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हुए। इससे जन सुराज के भीतर लगातार हो रही टूट की चर्चा और तेज हो गई है।
पोस्टर वार से भी गरमाई राजनीति
इसी बीच पटना में प्रशांत किशोर के खिलाफ लगाए गए पोस्टर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। पोस्टर में लिखा गया है— "केसी सिन्हा तो झांकी है, जमानत जब्त होना अभी बाकी है" और "इनको वोट नहीं, नोट चाहिए"। पोस्टर के नीचे "सौजन्य : बांकीपुर की जनता" लिखा गया है। इस पोस्टर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
भाजपा ने नए नेताओं का किया स्वागत
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पार्टी में शामिल हुए नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा की नीतियों और नेतृत्व से प्रभावित होकर विभिन्न दलों के नेता लगातार पार्टी से जुड़ रहे हैं। वहीं भाजपा में शामिल होने के बाद गोपाल सिंह और बिट्टू सिंह ने भी प्रशांत किशोर के नेतृत्व पर सवाल उठाए और भाजपा के साथ लंबे समय तक काम करने की बात कही। बांकीपुर उपचुनाव से पहले लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों ने बिहार की राजनीति को और अधिक रोचक बना दिया है।




