गया | 18 जुलाई 2026

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भगवान, पूजा-पाठ और आस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। गया जिले के अतरी प्रखंड स्थित अपने पैतृक गांव महकार पहुंचे मांझी ने कहा कि उन्होंने आज तक भगवान को नहीं देखा, इसलिए वे पूजा-पाठ में विश्वास नहीं रखते। उनके अनुसार, माता-पिता ही व्यक्ति के जीवन के वास्तविक भगवान होते हैं और वही साक्षात ब्रह्मा तथा विष्णु हैं।

'दिखावे की भक्ति का कोई मतलब नहीं'

जीतन राम मांझी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करता, उनकी सेवा नहीं करता और केवल मंदिर जाकर पूजा करता है, तो ऐसी भक्ति का कोई महत्व नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम जपना तभी सार्थक है जब इंसान अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्य निभाए। अन्यथा यह केवल दिखावा और आत्मसंतुष्टि का माध्यम बनकर रह जाता है।

माता-पिता के संघर्ष को किया याद

अपने संबोधन के दौरान मांझी भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि उनका जन्म बेहद गरीब परिवार में हुआ था, लेकिन उनके माता-पिता ने मजदूरी करके उन्हें पढ़ाया-लिखाया। उन्हीं के त्याग और आशीर्वाद की बदौलत वह बिहार के मुख्यमंत्री से लेकर केंद्र सरकार में मंत्री बनने तक का सफर तय कर सके। उन्होंने अपनी पुरानी कहावत "बाढ़े पूत पिता के धर्म और खेती उपजे अपने कर्म" का भी उल्लेख किया।

पूर्वजों की प्रतिमाओं का किया अनावरण

महकार गांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जीतन राम मांझी ने अपने पूर्वजों की प्रतिमाओं का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा अपने माता-पिता और पूर्वजों के योगदान को याद रखते हैं। इस अवसर पर बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन, पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।