भागलपुर | 21 जुलाई 2026

बिहार में सड़क अवसंरचना को नई रफ्तार देने वाली बक्सर-भागलपुर सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण केंद्र सरकार की बजाय बिहार सरकार अपने स्तर पर कराएगी। परियोजना की जिम्मेदारी बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएसआरडीसीएल) को सौंपी गई है। इसके साथ ही डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

छह महीने में तैयार होगी डीपीआर

बीएसआरडीसीएल ने कंसल्टेंसी एजेंसी के चयन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। चयनित एजेंसी को छह महीने के भीतर डीपीआर तैयार कर निगम को सौंपनी होगी। इसके अलावा परियोजना के वित्तीय, तकनीकी और संविदात्मक कार्यों की निगरानी के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजर (टीए) की भी नियुक्ति की जाएगी, ताकि निर्माण कार्य तय समय पर आगे बढ़ सके।

बक्सर से भागलपुर तक बनेगा 350 किलोमीटर का हाई-स्पीड कॉरिडोर

प्रस्तावित एक्सप्रेसवे लगभग 350 किलोमीटर लंबा होगा। यह बक्सर से शुरू होकर आरा, पटना, मोकामा और मुंगेर होते हुए भागलपुर तक पहुंचेगा। परियोजना के तहत एनएच-922, एनएच-31 और एनएच-33 के कई हिस्सों का चौड़ीकरण कर उन्हें चार से छह लेन तक विकसित किया जाएगा। एक्सेस-कंट्रोल्ड होने के कारण इस मार्ग पर यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और तेज होगी।

इन जिलों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

इस एक्सप्रेसवे से बक्सर, भोजपुर, पटना, मोकामा, मुंगेर और भागलपुर सहित कई जिलों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। उद्योगों, कृषि उत्पादों की ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी। साथ ही विक्रमशिला, सुल्तानगंज, मुंगेर और पटना जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा।

9 घंटे का सफर घटकर 4 घंटे होने की उम्मीद

वर्तमान में बक्सर से भागलपुर तक पहुंचने में करीब 9 घंटे का समय लगता है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यही दूरी लगभग 4 घंटे में तय की जा सकेगी। इससे ईंधन की बचत होगी, परिवहन लागत घटेगी और पश्चिमी व पूर्वी बिहार के बीच आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

5 अगस्त को खुलेगी तकनीकी बोली

बीएसआरडीसीएल के अनुसार, परियोजना की तकनीकी बोली 5 अगस्त को खोली जाएगी। इसके बाद सफल एजेंसी का चयन कर अगस्त से डीपीआर तैयार करने का कार्य शुरू होने की संभावना है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाकर बिहार को आधुनिक हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क से जोड़ना है।