पटना | 18 जुलाई 2026

बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र में नया उच्च शिक्षा विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद सरकारी डिग्री कॉलेजों का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। साथ ही कॉलेज शिक्षकों के राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।

राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहेंगे शिक्षक

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार सरकारी कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा का सार्वजनिक समर्थन, प्रचार या राजनीतिक लेखन नहीं कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे शैक्षणिक संस्थानों में निष्पक्ष और बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा।

विश्वविद्यालयों से अलग होंगे डिग्री कॉलेज

नई व्यवस्था के तहत राज्य के लगभग 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक नियंत्रण से हटाकर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाने की तैयारी है। इसके बाद कॉलेजों के संचालन, प्रशासन और वित्तीय निर्णय सीधे विभाग द्वारा लिए जाएंगे, जबकि विश्वविद्यालयों का मुख्य फोकस स्नातकोत्तर (PG) शिक्षा और शोध कार्यों पर रहेगा।

सरकार करेगी नियुक्ति और तबादले

विधेयक के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति, तबादला, पदोन्नति और सेवा संबंधी सभी निर्णय अब उच्च शिक्षा विभाग करेगा। इसके लिए बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन का भी प्रस्ताव है। साथ ही सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए NET और स्नातकोत्तर डिग्री को न्यूनतम योग्यता बनाने तथा पीएचडी की अनिवार्यता समाप्त करने पर भी विचार किया जा रहा है।

हर जिले में होगा उच्च शिक्षा पदाधिकारी

सरकार प्रत्येक जिले में उच्च शिक्षा पदाधिकारी की नियुक्ति भी करेगी, जो सरकारी डिग्री कॉलेजों की पढ़ाई, प्रशासन और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी करेंगे। यदि यह विधेयक पारित होता है तो बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक प्रशासनिक और शैक्षणिक बदलाव देखने को मिलेंगे।