पटना | 31 जुलाई 2026: बिहार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में आयोजित CPR प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पता चला कि प्रशिक्षण लेने पहुंचे करीब 80 प्रतिशत डॉक्टरों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) की सही तकनीक की जानकारी नहीं थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने नियमित अंतराल पर प्रशिक्षण आयोजित करने का फैसला किया है।
300 डॉक्टरों की ट्रेनिंग में सामने आई स्थिति
पिछले छह महीनों में राज्य के विभिन्न PHC और सदर अस्पतालों से आए करीब 300 चिकित्सकों को IGIMS के नेशनल इमरजेंसी लाइफ सपोर्ट (NELS) स्किल सेंटर में प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान यह पाया गया कि अधिकांश डॉक्टरों को आपातकालीन स्थिति में CPR देने की सही प्रक्रिया का पर्याप्त ज्ञान नहीं था।
हर दो महीने पर होगी ट्रेनिंग
IGIMS के विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर और सही तरीके से CPR देने से हार्ट अटैक या हृदय गति रुकने की स्थिति में मरीज की जान बचाई जा सकती है। इसी वजह से अब राज्यभर के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा।
BLS की जानकारी में भी कमी
प्रशिक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि लगभग 50 प्रतिशत डॉक्टरों को बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) की भी पूरी जानकारी नहीं थी। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज के बेहोश होने और सांस रुकने की स्थिति की पहचान करना और समय पर प्राथमिक उपचार देना जीवन बचाने में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
CPR क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के शुरुआती कुछ मिनटों में सही CPR मिलने पर मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए केवल डॉक्टर ही नहीं, आम लोगों को भी इसकी बुनियादी जानकारी होनी चाहिए।




