पटना, 20 अगस्त 2026 : बिहार में छात्र आंदोलन और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया है। बुधवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अगुवाई में गांधी मैदान के जेपी गोलंबर से राजभवन तक मार्च निकाला गया। पुलिस ने इनकम टैक्स गोलंबर के पास मार्च को रोक दिया। इस दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। फिर पुलिस ने तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। लेकिन इस पूरे प्रदर्शन का सियासी महत्व केवल छात्र आंदोलन और पेपर लीक तक सीमित नहीं है। करीब 11 साल बाद RJD का राजभवन मार्च और लंबे अंतराल के बाद तेजस्वी यादव का इस तरह सड़क पर उतरना बिहार की बदलती राजनीति के बीच बड़ा संदेश माना जा रहा है। इसे राजद की अपनी खिसकती जमीन को बचाने की कवायद भी माना जा रहा है।
11 साल बाद RJD ने किया राजभवन मार्च
RJD ने करीब 11 साल बाद राजभवन मार्च किया। इससे पहले पार्टी ने 2015 में ऐसा प्रदर्शन किया था। उस समय जातीय जनगणना से जुड़ी मांग को लेकर RJD ने राजभवन का रुख किया था। बुधवार के मार्च में छात्र आंदोलन, कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। पार्टी ने सरकार से छात्रों की समस्याओं पर जवाब देने और परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की।
लंबे समय बाद सड़क पर दिखे तेजस्वी
तेजस्वी यादव लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर पैदल मार्च करते हुए उनका सड़क पर उतरना लंबे समय बाद देखने को मिला। इससे पहले मार्च 2021 में भी तेजस्वी एक प्रस्तावित कानून के विरोध में सड़क पर उतरे थे। उस दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा अलग-अलग मुद्दों पर तेजस्वी ने यात्राओं और आंदोलनों के जरिए जनता के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
RJD के आंदोलन की पुरानी राजनीति
मालूम हो कि RJD की राजनीति में सड़क पर उतरकर आंदोलन करने की लंबी परंपरा रही है। 2018 में मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले के विरोध में तेजस्वी यादव ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विपक्षी नेताओं को जुटाया था। इसके अलावा जनादेश अपमान यात्रा, आरक्षण बढ़ाओ यात्रा, बेरोजगारी हटाओ यात्रा, जन विश्वास यात्रा और वोटर अधिकार यात्रा जैसे कार्यक्रमों के जरिए भी तेजस्वी यादव ने जनता से सीधा संपर्क साधा। इसके बावजूद हाल के वर्षों में पार्टी का बड़ा आंदोलनात्मक चेहरा अपेक्षाकृत कम दिखाई दिया। ऐसे में राजभवन मार्च को संगठन और कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
तेजस्वी को अब सड़क पर उतरने की जरूरत क्यों पड़ी ?
बिहार की राजनीति में युवाओं और छात्रों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है। पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर छात्रों के बीच नाराजगी के बीच RJD ने इसे सरकार को घेरने के अवसर के तौर पर इस्तेमाल किया। तेजस्वी यादव के सड़क पर उतरने का एक संदेश यह भी है कि RJD सिर्फ सदन, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया तक सीमित विपक्ष नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर सड़क पर भी संघर्ष कर सकती है।
प्रशांत किशोर की राजनीति ने बढ़ाई चुनौती ?
RJD के सामने एक और राजनीतिक चुनौती उभरती दिखाई दे रही है। बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत ने बिहार की राजनीति में तीसरे विकल्प की चर्चा को तेज कर दिया है। अब RJD के सामने केवल NDA के खिलाफ अपनी जमीन मजबूत रखने की चुनौती नहीं है। जन सुराज के बढ़ते प्रभाव के बीच पार्टी को अपने पारंपरिक समर्थन आधार के साथ युवाओं और नए मतदाताओं को भी जोड़ना होगा।
RJD के सामने दोहरी चुनौती
तेजस्वी यादव के सामने इस समय दो स्तर पर चुनौती है। एक तरफ उन्हें सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष की भूमिका निभानी है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के कार्यकर्ताओं में संघर्ष की भावना बनाए रखनी है। इसके साथ ही जन सुराज के उभार के बीच RJD को अपने राजनीतिक आधार को सुरक्षित रखने की रणनीति भी बनानी होगी।
मार्च के पीछे बड़ा राजनीतिक संदेश
RJD के लिए यह मार्च केवल सरकार विरोधी प्रदर्शन नहीं माना जा रहा है। लंबे अंतराल के बाद तेजस्वी यादव का खुद सड़क पर उतरना पार्टी के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और विपक्ष की भूमिका को आक्रामक बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। छात्र आंदोलन और पेपर लीक तत्काल मुद्दे हैं, लेकिन इसके राजनीतिक मायने इससे कहीं ज्यादा व्यापक हैं। तेजस्वी यादव का यह शक्ति प्रदर्शन संकेत देता है कि RJD आने वाले राजनीतिक मुकाबले के लिए सड़क से लेकर संगठन तक अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आगे होता क्या है।




