गया | 17 जुलाई 2026

गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के रंगून नगर गांव में गुरुवार शाम हुए दर्दनाक हादसे का सुखद अंत तब हुआ, जब करीब सात घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 3 वर्षीय पीयूष कुमार को 300 फीट गहरे बोरवेल से सकुशल बाहर निकाल लिया गया। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीम ने पूरी रात बेहद सावधानी और तकनीकी दक्षता के साथ अभियान चलाया। मासूम बोरवेल में करीब 30 फीट की गहराई पर फंस गया था। बाहर निकालने के तुरंत बाद उसे प्राथमिक उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) फतेहपुर भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति स्थिर बताई।

शाम 6:28 बजे खेलते समय हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम करीब 6:28 बजे पीयूष घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान नल-जल योजना के लिए खोदे गए खुले बोरवेल में वह अचानक गिर गया। घटना की सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और बच्चे के सुरक्षित बाहर निकलने की दुआ करने लगे। प्रशासन ने तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू कराया।

एनडीआरएफ-एसडीआरएफ ने दिखाई तकनीकी दक्षता

रेस्क्यू अभियान के दौरान वजीरगंज कैंप डीएसपी सुनील कुमार पांडेय, अंचलाधिकारी अमित सिंह, बीडीओ शशि भूषण साहू सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम ने आधुनिक उपकरणों की मदद से लगातार अभियान चलाया और करीब सात घंटे बाद पीयूष को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। बच्चे के बाहर आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर राहत जताई।

स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर उठे सवाल

रेस्क्यू अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर भी सवाल खड़े हुए। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर भेजे गए पांच ऑक्सीजन सिलेंडरों में से चार खाली थे, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। हालांकि प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था कर स्थिति को नियंत्रित कर लिया। आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

सफल अभियान की हर तरफ हो रही सराहना

पीयूष के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद पूरे गांव में खुशी का माहौल है। परिजनों ने राहत की सांस ली और रेस्क्यू अभियान में जुटी एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला प्रशासन, स्थानीय प्रशासन तथा सभी बचावकर्मियों का आभार जताया। ग्रामीणों ने इसे टीमवर्क, धैर्य और साहस का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए भविष्य में खुले बोरवेल को सुरक्षित ढंग से बंद करने की मांग भी की, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।