ल्हासा, 23 अक्टूबर 2026 : तिब्बत में सात तीव्रता के भूकंप से भारी नुकसान हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस प्राकृतिक आपदा में 16 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 54 से भी ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। भूकंप का केंद्र तिब्बत के नागकू क्षेत्र में जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे बताया गया है। इसके झटके पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी महसूस किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप भारतीय समयानुसार गुरुवार रात 8 : 03 बजे आया। चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के मुताबिक स्थानीय क्षेत्र में झटके स्पष्ट रूप से महसूस किए गए। भूकंप के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य चलाए जाने की जानकारी सामने आई है।
ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर था भूकंप का केंद्र
भूकंप का केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर नागकू क्षेत्र में बताया गया है। इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर थी। कम गहराई पर आने वाले भूकंप सतह पर तेज झटके पैदा कर सकते हैं, हालांकि नुकसान की वास्तविक स्थिति स्थानीय परिस्थितियों और इमारतों की मजबूती पर भी निर्भर करती है। भूकंप के दौरान एक सुपरमार्केट में सामान गिरने और लोगों के घरों से बाहर निकलने के दृश्य सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। प्रभावित गांवों में राहतकर्मियों द्वारा मकानों का जायजा लेने और मलबा हटाने की तस्वीरें भी जारी की गई हैं।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी महसूस हुए झटके
तिब्बत में भूकंप के बीच पाकिस्तान में 4.9 और अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता के झटके महसूस किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन भूकंपों का तिब्बत में आए भूकंप से सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए अलग-अलग भूकंपीय रिकॉर्ड देखना जरूरी है।
तिब्बत में क्यों आते हैं बार-बार भूकंप ?
तिब्बत भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। भारतीय टेक्टोनिक प्लेट लगातार उत्तर की ओर बढ़ रही है और यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। इसी भूगर्भीय प्रक्रिया ने हिमालय पर्वत श्रृंखला के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दोनों प्लेटों के बीच दबाव जमा होने से जमीन के नीचे मौजूद चट्टानों और भ्रंशों में हलचल होती है। जब यह दबाव अचानक मुक्त होता है, तो भूकंप आता है। इसी वजह से हिमालय और तिब्बत के आसपास के क्षेत्रों में भूकंप का खतरा बना रहता है।
जनवरी 2025 में भी आया था शक्तिशाली भूकंप
तिब्बत में जनवरी 2025 में तिंगरी काउंटी के आसपास 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। उस घटना में तिब्बत और पड़ोसी क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ था। इसके झटके नेपाल और उत्तर भारत के कई इलाकों में भी महसूस किए गए थे। तिब्बत और आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में भूकंप का खतरा भूगर्भीय संरचना से जुड़ा है। ऐसे क्षेत्रों में भूकंपरोधी निर्माण, समय पर चेतावनी और आपदा प्रबंधन की तैयारियां बेहद महत्वपूर्ण हैं।




