पिछले कुछ वर्षों में Gen Z के बीच "Silent Quitting" तेजी से चर्चा का विषय बना है। हालांकि नाम से लगता है कि कर्मचारी नौकरी छोड़ रहे हैं, लेकिन इसका मतलब केवल उतना ही काम करना है जितना उनकी नौकरी की जिम्मेदारियों में शामिल है। अतिरिक्त काम, लगातार ओवरटाइम और निजी समय में भी ऑफिस के लिए उपलब्ध रहने की संस्कृति से दूरी बनाना ही Silent Quitting कहलाता है।
Gen Z आमतौर पर 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोगों को कहा जाता है। यानी वर्तमान में लगभग 14 से 29 वर्ष की उम्र के लोग इस पीढ़ी में आते हैं। कॉर्पोरेट सेक्टर में खासकर 22 से 29 वर्ष के युवा कर्मचारियों के बीच यह ट्रेंड तेजी से देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि COVID-19 महामारी के बाद कर्मचारियों की सोच में बड़ा बदलाव आया। लॉकडाउन, वर्क फ्रॉम होम और बढ़ते मानसिक दबाव ने लोगों को यह एहसास कराया कि जीवन केवल नौकरी तक सीमित नहीं है। अब युवा कर्मचारी वेतन और प्रमोशन के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और वर्क-लाइफ बैलेंस को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
इस बदलाव की झलक Gallup की State of the Global Workplace 2026 रिपोर्ट में भी दिखाई देती है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में केवल 20 प्रतिशत कर्मचारी ही अपने काम से पूरी तरह जुड़े हुए महसूस करते हैं। वहीं 64 प्रतिशत कर्मचारी "Not Engaged" श्रेणी में हैं, जबकि 16 प्रतिशत कर्मचारी "Actively Disengaged" हैं। रिपोर्ट बताती है कि कर्मचारी जुड़ाव 2022 में 23 प्रतिशत के शिखर से घटकर 2025 में 20 प्रतिशत पर पहुंच गया।
Gallup का अनुमान है कि कर्मचारियों के घटते जुड़ाव की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को करीब 438 अरब डॉलर की उत्पादकता हानि हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि जब कर्मचारियों को अपने काम में उद्देश्य, सम्मान और विकास के अवसर नहीं दिखते, तब Silent Quitting जैसी प्रवृत्तियां बढ़ने लगती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार डिप्रेशन और एंग्जायटी के कारण हर साल लगभग 12 अरब कार्य दिवस प्रभावित होते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार और बर्नआउट के कारण कई युवा कर्मचारी अब अपने काम और निजी जीवन के बीच स्पष्ट सीमाएं तय कर रहे हैं।
हालांकि Silent Quitting को लेकर राय बंटी हुई है। कुछ लोग इसे कर्मचारियों की घटती प्रतिबद्धता मानते हैं, जबकि कई विशेषज्ञ इसे बर्नआउट से बचने और स्वस्थ कार्य संस्कृति की दिशा में उठाया गया कदम बताते हैं।
कुल मिलाकर, Silent Quitting केवल सोशल मीडिया का ट्रेंड नहीं है, बल्कि कार्यस्थल पर बदलती सोच का संकेत है। Gen Z अब काम को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है, लेकिन पूरा जीवन नहीं। यही वजह है कि नई पीढ़ी नौकरी के साथ-साथ मानसिक शांति, व्यक्तिगत समय और बेहतर जीवन गुणवत्ता को भी प्राथमिकता दे रही है।
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Gen Z के बीच क्यों बढ़ रहा है 'Silent Quitting'? रिपोर्ट में सामने आईं बड़ी वजहें
Gen Z के बीच Silent Quitting तेजी से बढ़ रहा है। Gallup रिपोर्ट के मुताबिक केवल 20% कर्मचारी ही अपने काम से पूरी तरह जुड़े हुए महसूस करते हैं।




