AI से बढ़ रही Loneliness? रिसर्च में सामने आए मिले-जुले नतीजे

AI चैटबॉट्स अब सिर्फ सवालों के जवाब देने का जरिया नहीं रहे। बड़ी संख्या में लोग भावनात्मक सहारे, सलाह और बातचीत के लिए भी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या लोग दोस्तों और परिवार की जगह AI से जुड़ने लगे हैं?

इस विषय पर दुनिया के कई बड़े संस्थानों ने रिसर्च की है। अमेरिका के MIT Media Lab और OpenAI द्वारा किए गए एक अध्ययन में करीब 1,000 लोगों और 3 लाख से अधिक चैट संदेशों का विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि AI चैटबॉट्स का अत्यधिक उपयोग करने वाले कुछ लोगों में अकेलेपन और भावनात्मक निर्भरता के संकेत अधिक दिखाई दिए।

वहीं ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े शोध में पाया गया कि AI Companion ऐप्स कई लोगों को अस्थायी भावनात्मक राहत दे सकते हैं। कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि AI से बातचीत के बाद उन्हें तनाव कम महसूस हुआ और अपनी बात खुलकर कहने का मौका मिला।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, AI का प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग-अलग होता है। जो लोग पहले से सामाजिक रूप से अधिक जुड़े हुए थे, उन पर इसका असर सीमित रहा, जबकि अकेलापन महसूस करने वाले लोग AI पर ज्यादा निर्भर होते दिखाई दिए।

इस बीच Gallup की State of the Global Workplace 2026 रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में केवल 20% कर्मचारी ही अपने काम से पूरी तरह जुड़े हुए महसूस करते हैं। वहीं 64% कर्मचारी "Not Engaged" और 16% "Actively Disengaged" श्रेणी में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता अकेलापन और सामाजिक दूरी भी इस बदलती मानसिक स्थिति से जुड़ा हो सकता है।

कुल मिलाकर, अभी तक की रिसर्च यह नहीं कहती कि AI सीधे तौर पर अकेलेपन को बढ़ा रहा है। लेकिन यह जरूर संकेत देती है कि AI का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल लोगों को वास्तविक सामाजिक संपर्क से दूर कर सकता है। इसलिए विशेषज्ञ तकनीक और वास्तविक रिश्तों के बीच संतुलन बनाए रखने की सलाह देते हैं।