नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026 : भारत का रक्षा उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने यूरोपीय देशों को ₹8,271 करोड़ के गोला-बारूद की आपूर्ति की है। साथ ही इस रिपोर्ट में पूर्वी और मध्य यूरोप को भारत के गोला-बारूद निर्यात में 1,600% की बढ़ोतरी का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत इस क्षेत्र में दक्षिण कोरिया के बाद गोला-बारूद का दूसरा बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है। मालूम हो कि चार साल पहले भारत इस सूची में 28वें स्थान पर था। मगर आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है और आने वाले दिनों में भारत यूरोप के साथ अन्य देशों को भी गोला-बारूद बेचेगा।
यूरोप में क्यों बढ़ी भारतीय गोला-बारूद की मांग ?
फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद यूरोप में रक्षा जरूरतें काफी बढ़ी हैं। हथियारों और सैन्य उपकरणों की मांग बढ़ने से कई देशों ने अपनी आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान दिया है। स्वीडन स्थित स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक 2021–25 के दौरान यूरोपीय देशों का प्रमुख हथियारों का आयात 2016–20 की तुलना में 210% बढ़ा। हालांकि, SIPRI के ये आंकड़े प्रमुख हथियारों के अंतरराष्ट्रीय हस्तांतरण से संबंधित हैं और इन्हें गोला-बारूद के विशिष्ट निर्यात आंकड़ों के समान नहीं माना जाना चाहिए।
यूरोपीय देशों के जरिए यूक्रेन तक पहुंचा भारतीय गोला-बारूद
भारतीय कंपनियां यूरोपीय देशों को गोला-बारूद बेच रही हैं। सितंबर 2024 में एक जांच में बताया गया था कि भारत में निर्मित कुछ आर्टिलरी शेल यूरोपीय खरीदारों के जरिए यूक्रेन पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार भारतीय निर्यात नियमों के तहत खरीदारों को हथियारों के घोषित उपयोग और अनधिकृत हस्तांतरण संबंधी शर्तों का पालन करना होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ने सीधे यूक्रेन को हथियार भेजे। भारतीय कंपनियों से खरीदे गए कुछ गोला-बारूद यूरोपीय देशों के माध्यम से वहां पहुंचे थे। भारत की प्रत्यक्ष आपूर्ति और तीसरे देशों से हुए हस्तांतरण के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
इजराइल को भी रक्षा उपकरणों की आपूर्ति
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मार्च 2026 तक भारत इजराइल को विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन के पुर्जे सप्लाई करने वाले प्रमुख विदेशी आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया था। इसमें भारत के नौवें से तीसरे स्थान पर पहुंचने का भी उल्लेख है। इसके अलावा, रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में भारत ने इजराइल को करीब ₹630 करोड़ के आर्टिलरी शेल, मोर्टार राउंड और विस्फोटक भेजे। दावा है कि यह राशि इससे पहले के छह वर्षों के कुल निर्यात के बराबर थी। इन विशिष्ट आंकड़ों की पुष्टि के लिए संबंधित व्यापार डेटा और समयावधि की जांच आवश्यक है।
भारत के रक्षा उद्योग के लिए क्या मायने हैं ?
भारत लंबे समय से रक्षा उपकरणों का बड़ा आयातक रहा है, मगर घरेलू उत्पादन और निर्यात बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। गोला-बारूद, सैन्य उपकरणों और उनके पुर्जों की विदेशी मांग भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा कर सकती है। फिर भी भारत की वैश्विक रक्षा निर्यात रैंकिंग और गोला-बारूद की आपूर्ति रैंकिंग अलग-अलग मापदंडों पर आधारित हो सकती हैं।




