मगध विश्वविद्यालय में कथित 150 से 200 करोड़ रुपये के वितीय घोटाले,अवैध निकासी, गलत नियुक्तियोंनियुकित्यो और भ्रष्टाचारबी के आरोपों के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है, राज्यपाल ने कार्यवाई करते हुए प्रभारी कुलपति प्रो. शशि शाही लो पद से हटा दिया है!

पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब औरंगाबाद के पूर्व सांसद और भाजपा नेता सुशील कुमार सिंह ने 15 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर मगध विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। पत्र में दावा किया गया कि रिटायरमेंट के बाद भी VC का प्रभार संभाल रहे प्रो. शशि प्रताप शाही के कार्यकाल में विश्वविद्यालय कोष से 150 से 200 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई, अवैध नियुक्तियां की गईं और कई असंवैधानिक फैसले लिए गए।

पूर्व सांसद ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत है। शिकायत की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय, राज्यपाल सचिवालय, लोक शिकायत कार्यालय पटना और निगरानी विभाग को भी भेजी गई थी। सुशील कुमार सिंह ने मांग की थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।

इस मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। पटना हाईकोर्ट में CWJC No-5762/2026 के तहत जनहित याचिका दायर की गई है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिकायतकर्ताओं ने शपथ-पत्र के साथ राज्यपाल सचिवालय में शिकायतें दर्ज कराई हैं।

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लगातार बढ़ते विवाद और सार्वजनिक दबाव के बाद राज्यपाल ने संज्ञान लेते हुए प्रो. शशि प्रताप शाही को हटाने का फैसला लिया। नए प्रभारी कुलपति बनाए गए प्रो. दिलीप केसरी को लेकर राजभवन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वे कुलाधिपति यानी राज्यपाल की मंजूरी के बिना कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे।

हालांकि अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन या हटाए गए प्रभारी कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति और शैक्षणिक जगत में हलचल तेज हो गई है। छात्र संगठनों, शिक्षकों और विपक्षी दलों ने विश्वविद्यालय में हुए कथित घोटालों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां आगे क्या कार्रवाई करती हैं और क्या इस मामले में विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों पर भी शिकंजा कसता है।