पटना: बिहार के उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राज्य के चुनिंदा कॉलेजों में ऐसी व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसमें विद्यार्थी डिग्री की पढ़ाई के साथ-साथ उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को हर महीने 12,300 रुपये का स्टाइपेंड भी दिया जाएगा।

राज्य में शुरू की जा रही यह पहल युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें पढ़ाई के दौरान ही कार्यस्थल का अनुभव भी दिलाएगी। माना जा रहा है कि इससे कॉलेज से निकलने के बाद रोजगार पाने की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी।

क्या है अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम?

इस नई व्यवस्था को अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) के तहत लागू किया जा रहा है। इसके तहत छात्रों को अपने अकादमिक कोर्स के साथ उद्योगों और संस्थानों में प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और रोजगार के बीच मौजूद अंतर को कम करना है। छात्र किताबों में सीखी गई जानकारी को वास्तविक कार्यक्षेत्र में लागू करना सीखेंगे, जिससे उनका कौशल और आत्मविश्वास दोनों बढ़ेगा।

हर महीने मिलेगा स्टाइपेंड

योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता भी मिलेगी। अप्रेंटिसशिप के दौरान चयनित छात्रों को प्रति माह 12,300 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा। इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ आर्थिक सहयोग भी मिलेगा और वे अपने करियर की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे।

रोजगार के लिए होंगे ज्यादा तैयार

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। कंपनियां ऐसे युवाओं को प्राथमिकता देती हैं, जिनके पास व्यावहारिक अनुभव और कार्यकुशलता हो। AEDP के माध्यम से छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही इंडस्ट्री एक्सपोजर मिलेगा, जिससे नौकरी मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

किन छात्रों को मिलेगा लाभ?

शुरुआती चरण में यह कार्यक्रम राज्य के चयनित कॉलेजों में लागू किया जाएगा। इन संस्थानों में नामांकित छात्र निर्धारित शर्तों के अनुसार अप्रेंटिसशिप का लाभ उठा सकेंगे। आने वाले समय में इस मॉडल का विस्तार अन्य कॉलेजों तक भी किया जा सकता है।

शिक्षा और उद्योग के बीच बनेगा मजबूत संबंध

इस पहल को बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे कॉलेजों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। छात्र पढ़ाई पूरी करने से पहले ही कार्य संस्कृति, तकनीकी प्रक्रियाओं और पेशेवर वातावरण को समझ सकेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह योजना सफल रहती है, तो बिहार के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलने के साथ-साथ राज्य की स्किल डेवलपमेंट व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।