खेती में आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अब अनाज के भंडारण को भी स्मार्ट बनाने की दिशा में अहम पहल हुई है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और स्मार्ट सेंसर की मदद से गोदाम में रखे अनाज की स्थिति पर लगातार नजर रखेगी।
इस तकनीक की खासियत यह है कि अनाज के खराब होने, नमी बढ़ने या कीट लगने जैसी समस्या आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। गोदाम के वातावरण में होने वाले बदलावों की जानकारी सिस्टम पहले ही जुटाएगा और स्थिति बिगड़ने की आशंका होने पर किसान या गोदाम प्रभारी के मोबाइल पर अलर्ट भेज दिया जाएगा।
दो साल के शोध के बाद तैयार हुई तकनीक
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीएस पांडेय के मार्गदर्शन में बहुविषयक वैज्ञानिक टीम ने इस तकनीक को विकसित किया है। कृषि अभियंत्रण एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर. सुब्बैया के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने करीब दो वर्षों तक इस दिशा में काम किया।
शोध के दौरान गेहूं के भंडारण पर तकनीक का सफल परीक्षण भी किया गया है। अब इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की दिशा में तैयारी की जा रही है।
घर के अनाज डिब्बे से बड़े सरकारी गोदाम तक इस्तेमाल
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह तकनीक केवल बड़े गोदामों तक सीमित नहीं रहेगी। इसे घर में रखे करीब 10 किलो अनाज के कंटेनर से लेकर भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य के बड़े सरकारी भंडार गृहों तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके लिए गोदाम के अलग-अलग हिस्सों में स्मार्ट सेंसर लगाए जाएंगे। ये सेंसर तापमान, सापेक्ष आर्द्रता, कार्बन डाइऑक्साइड समेत कई महत्वपूर्ण मानकों की लगातार निगरानी करेंगे।
मोबाइल पर पहुंचेगा हर जरूरी अपडेट
सेंसर से मिलने वाले आंकड़े वाई-फाई के जरिए मोबाइल एप पर भेजे जाएंगे। AI सिस्टम इन आंकड़ों का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि अनाज के भंडारण की स्थिति सुरक्षित है या उसमें खराब होने का खतरा बढ़ रहा है।
अगर किसी पैरामीटर का स्तर निर्धारित सीमा से बाहर जाता है तो संबंधित व्यक्ति के मोबाइल पर तत्काल चेतावनी भेजी जाएगी। जरूरत पड़ने पर छोटे स्वचालित वेंटिलेशन उपकरण भी लगाए जा सकते हैं, जो परिस्थितियों के अनुसार खुद सक्रिय होकर गोदाम का वातावरण नियंत्रित करने में मदद करेंगे।
Henderson Model से तय होगी अनाज के लिए सुरक्षित नमी
इस स्मार्ट सिस्टम में तापमान और सापेक्ष आर्द्रता के आधार पर अनाज की संतुलन नमी का अनुमान लगाया जाएगा। इसके लिए स्थापित Henderson Model का इस्तेमाल किया जाएगा।
AI सिस्टम तापमान, आर्द्रता, कार्बन डाइऑक्साइड और संतुलन नमी से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करेगा। इसके आधार पर अनाज की मौजूदा स्थिति और भविष्य में गुणवत्ता खराब होने की संभावना का आकलन किया जा सकेगा।
सुरक्षित सीमा पार होने पर सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। इससे गोदाम संचालक समय रहते जरूरी कदम उठा सकेंगे और अनाज को खराब होने से बचाने की कोशिश की जा सकेगी।
पुराने गोदामों में भी लग सकेगी तकनीक
इस तकनीक को पोर्टेबल बनाने पर भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि गांवों और दूरदराज के इलाकों में मौजूद पुराने या पारंपरिक गोदामों में भी इसे आसानी से लगाया जा सके।
विश्वविद्यालय की ओर से किसानों, गोदाम संचालकों और तकनीकी कर्मचारियों को इस तकनीक के इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षण देने की भी तैयारी की जा रही है।
भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने की उम्मीद
अनाज की कटाई के बाद भंडारण के दौरान नमी, तापमान में बदलाव और कीटों के कारण बड़ी मात्रा में खाद्यान्न की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। नई तकनीक का उद्देश्य समस्या सामने आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसके शुरुआती संकेतों को पहचानना है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर गोदाम के वातावरण की लगातार निगरानी हो और खतरे की जानकारी समय रहते मिल जाए तो भंडारण के दौरान होने वाले खाद्यान्न नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे किसानों के साथ-साथ बड़े भंडारण केंद्रों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।




