पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच एनडीए के घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने गठबंधन की राजनीति में चर्चा बढ़ा दी है। रालोमो के प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा के समर्थन में पार्टी के तीन विधायकों के आने की बात सामने आई है।
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू के आनंद पुष्कर एनडीए उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। वहीं रालोमो के प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा भी इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में रालोमो के तीन विधायकों का रामपुकार सिन्हा के समर्थन में सामने आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रामपुकार सिन्हा के समर्थन में कौन-कौन विधायक?
रामपुकार सिन्हा को समर्थन देने वालों में रालोमो के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह, मधुबनी विधायक माधव आनंद और बाजपट्टी विधायक रामेश्वर महतो के नाम सामने आए हैं।
इन नेताओं के समर्थन के बाद सारण शिक्षक सीट पर मुकाबले को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर एनडीए से दूरी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। रालोमो विधायक माधव आनंद ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि रामपुकार सिन्हा का समर्थन करने का फैसला पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मान और उनकी भावनाओं से जुड़ा है।
माधव आनंद बोले- सरकार के साथ समर्थन जारी रहेगा
माधव आनंद ने कहा कि रामपुकार सिन्हा रालोमो के प्रदेश महासचिव हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को देखते हुए उनके समर्थन में खड़ा होना जरूरी है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह फैसला सरकार या एनडीए के खिलाफ नहीं है। माधव आनंद के मुताबिक, वे सरकार के समर्थन में पहले भी थे और आगे भी बने रहेंगे।
इस बयान के बाद यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि रामपुकार सिन्हा के समर्थन को सरकार से समर्थन वापस लेने या एनडीए से अलग होने के फैसले के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
JDU उम्मीदवार आनंद पुष्कर के सामने रामपुकार सिन्हा
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू ने आनंद पुष्कर को एनडीए उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा है। दूसरी ओर रालोमो के प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा भी चुनाव लड़ रहे हैं।
एनडीए के घटक दल रालोमो के तीन विधायकों का रामपुकार सिन्हा के समर्थन में आना इसलिए अहम है, क्योंकि चुनावी मैदान में उनका मुकाबला गठबंधन के अधिकृत उम्मीदवार आनंद पुष्कर से है।
हालांकि, रालोमो विधायकों की ओर से इसे पार्टी या सरकार के खिलाफ राजनीतिक बगावत के बजाय कार्यकर्ताओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया जा रहा है।
रालोमो में पहले भी सामने आती रही है नाराजगी की चर्चा
रालोमो के भीतर कुछ विधायकों की नाराजगी को लेकर चर्चा पहले भी सामने आती रही है। दिनारा विधायक आलोक सिंह, मधुबनी विधायक माधव आनंद और बाजपट्टी विधायक रामेश्वर महतो को लेकर पार्टी नेतृत्व से मतभेद की खबरें समय-समय पर चर्चा में रही हैं।
इसी साल इन तीनों विधायकों के जेडीयू में शामिल होने की अटकलें भी सामने आई थीं। हालांकि, बाद में इस संबंध में कोई औपचारिक राजनीतिक घोषणा नहीं हुई।
पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में नेताओं की मौजूदगी और गैरमौजूदगी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, इन घटनाक्रमों को लेकर नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं और किसी औपचारिक फैसले की घोषणा नहीं हुई है।
2025 के विधानसभा चुनाव में NDA के साथ था रालोमो
रालोमो ने 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव एनडीए के साथ मिलकर लड़ा था। पार्टी ने छह सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और चार सीटों पर जीत दर्ज की थी। मौजूदा विधानसभा में रालोमो के चार विधायक हैं।
ऐसे में पार्टी के तीन विधायकों का एनडीए के सहयोगी दल जेडीयू के उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ रहे रालोमो के प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा के समर्थन में आना गठबंधन के भीतर चर्चा का विषय बन गया है।
सारण शिक्षक सीट पर कई उम्मीदवार मैदान में
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में इस बार मुकाबला कई उम्मीदवारों के बीच है। जेडीयू के आनंद पुष्कर और रालोमो के रामपुकार सिन्हा के अलावा जन सुराज समर्थित अफाक अहमद भी चुनाव मैदान में हैं। वहीं राजद की ओर से प्रो. जयराम यादव का नाम सामने आया है।
कई राजनीतिक दलों और नेताओं की सक्रियता के कारण सारण शिक्षक सीट का चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। खासकर एनडीए के भीतर सहयोगी दल के नेताओं की अलग भूमिका ने इस सीट को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है।
अब उपेंद्र कुशवाहा के रुख पर नजर
रामपुकार सिन्हा के समर्थन में रालोमो के तीन विधायकों के सामने आने के बाद अब नजर पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर है। सबसे अहम सवाल यह है कि रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाते हैं।
फिलहाल माधव आनंद के बयान से इतना स्पष्ट है कि विधायकों का यह कदम सरकार से समर्थन वापस लेने का ऐलान नहीं है। उनके मुताबिक, रामपुकार सिन्हा का समर्थन पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मान और उनकी भावनाओं से जुड़ा मामला है।
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी मुकाबला आगे बढ़ने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रालोमो के भीतर सामने आया यह समर्थन किस तरह के राजनीतिक समीकरण बनाता है और इसका असर एनडीए के अधिकृत उम्मीदवार आनंद पुष्कर की चुनावी रणनीति पर कितना पड़ता है।




