बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तशिल्प परंपरा को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य के तीन विशिष्ट पारंपरिक उत्पादों—नालंदा की प्रसिद्ध बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया का पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पारंपरिक पिढ़िया पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। यह सम्मान इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान, गुणवत्ता और क्षेत्रीय विरासत को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को मिली वैश्विक पहचान: तीन पारंपरिक उत्पादों को मिला GI टैग
नालंदा की बावन बूटी साड़ी, गया के पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग को GI टैग मिलने से बिहार की कला और शिल्प को मिला नया सम्मान।




