पटना, 5 अक्टूबर 2026: बाल्डविन एकेडमी में बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से सोमवार को “समृद्धि के लिए सत्यनिष्ठा” (Probity for Prosperity) विषय पर सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक आचरण के महत्व से परिचित कराना रहा।

कार्यक्रम में बैंक ऑफ इंडिया के अतिरिक्त मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री के.एन.वी. चिन्ना राव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ बैंक ऑफ इंडिया, एफजीएमओ पटना के महाप्रबंधक श्री सौंदर्य भूषण साहनी, बैंक ऑफ इंडिया पटना जोन के जोनल मैनेजर श्री ओम प्रकाश चौधरी सहित बैंक के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बाल्डविन एकेडमी के सचिव श्री प्रभास कुमार की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना के साथ हुआ। इसके बाद विद्यालय की ओर से अतिथियों का सम्मान किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए बाल्डविन एकेडमी के प्राचार्य डॉ. राजीव रंजन सिन्हा ने कहा कि वास्तविक और स्थायी प्रगति की नींव ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और पारदर्शिता जैसे मूल्यों पर टिकी होती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में कम उम्र से ही नैतिक मूल्यों, जिम्मेदारी और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करना विद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के दौरान कक्षा IV से XII तक के विद्यार्थियों ने सत्यनिष्ठा, जिम्मेदार नागरिकता और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। विद्यार्थियों के लिए चित्रकला, निबंध लेखन और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता विद्यार्थियों को कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि श्री के.एन.वी. चिन्ना राव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए सतर्कता और जवाबदेही के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थागत सत्यनिष्ठा तथा दैनिक जीवन में नैतिक निर्णय लेने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए और विद्यार्थियों को अपने आचरण में ईमानदारी एवं पारदर्शिता को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि सतर्कता केवल संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी है। कार्यक्रम का समापन इस विचार के साथ हुआ कि सतर्कता की शुरुआत स्वयं से होती है और सत्यनिष्ठा को दैनिक जीवन के निर्णयों एवं व्यवहार का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।